दिल Poetry (page 164)

उन की निगाह-ए-नाज़ के क़ाबिल कहें जिसे

रज़ा जौनपुरी

तुझे ऐ ज़ाहिद-बदनाम समझाना भी आता है

रज़ा जौनपुरी

फिर राह दिखा मुझ को ऐ मशरब-ए-रिंदाना

रज़ा जौनपुरी

क्या पूछते हो मुझ को मोहब्बत में क्या मिला

रज़ा जौनपुरी

कुछ तो हासिल हो गया इरफ़ान-ए-मय-ख़ाना मुझे

रज़ा जौनपुरी

कैफ़ नसीब अब कहाँ ग़ुंचों के भी जमाल में

रज़ा जौनपुरी

झुक सके आप का ये सर तो झुका कर देखें

रज़ा जौनपुरी

ये किस मक़ाम पे ठहरा है कारवान-ए-वफ़ा

रज़ा हमदानी

मा'मूरा-ए-अफ़्क़ार में इक हश्र बपा है

रज़ा हमदानी

जुनूँ का राज़ मोहब्बत का भेद पा न सकी

रज़ा हमदानी

हुस्न पाबंद-ए-हिना हो जैसे

रज़ा हमदानी

हम सकूँ पाएँगे सलमाओं में क्या

रज़ा हमदानी

है ग़नीमत ये फ़रेब-ए-शब-ए-व'अदा ऐ दिल

रज़ा हमदानी

आ तुझ को ख़याल में बसाऊँ

रज़ा हमदानी

यारब तू उस के दिल से सदा रखियो ग़म को दूर

रज़ा अज़ीमाबादी

रफ़ू फिर कीजियो पैराहन-ए-यूसुफ़ को ऐ ख़य्यात

रज़ा अज़ीमाबादी

किस तरह 'रज़ा' तू न हो धवाने ज़माना

रज़ा अज़ीमाबादी

इस चश्म ओ दिल ने कहना न माना तमाम उम्र

रज़ा अज़ीमाबादी

ज़ुल्फ़ खोले था कहाँ अपनी वो फिर बेबाक रात

रज़ा अज़ीमाबादी

यार को बेबाकी में अपना सा हम ने कर लिया

रज़ा अज़ीमाबादी

यार के रुख़ ने कभी इतना न हैराँ किया

रज़ा अज़ीमाबादी

वबाल-ए-जान हर इक बाल है म्याँ

रज़ा अज़ीमाबादी

उस घड़ी कुछ थे और अब कुछ हो

रज़ा अज़ीमाबादी

उस चश्म ने कि तूतियों को नुक्ता-दाँ किया

रज़ा अज़ीमाबादी

टुक तू महमिल का निशाँ दे जल्द ऐ सूरत ज़रा

रज़ा अज़ीमाबादी

टुक बैठ तू ऐ शोख़-ए-दिल-आराम बग़ल में

रज़ा अज़ीमाबादी

शर्मिंदा नहीं कौन तिरी इश्वा-गरी का

रज़ा अज़ीमाबादी

सच कह 'रज़ा' ये किस से लगाई है साट-बाट

रज़ा अज़ीमाबादी

निकल मत घर से तू ऐ ख़ाना-आबाद

रज़ा अज़ीमाबादी

मौत भी आती नहीं हिज्र के बीमारों को

रज़ा अज़ीमाबादी

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