दिल Poetry (page 190)

सिर्फ़ आज़ार उठाने से कहाँ बनता है

इलियास बाबर आवान

फूल किताबें ले जा, तन्हा रहने दे

इलियास बाबर आवान

मेरा और फूलों का रिश्ता टूट गया

इलियास बाबर आवान

कफ़ील-ए-साअ'त-ए-सय्यार रक्खा होता है

इलियास बाबर आवान

और ही कहीं ठहरे और ही कहीं पहुँचे

इकराम मुजीब

क्या जाने किस की धुन में रहा दिल-फ़िगार चाँद

इकराम जनजुआ

हर राहत-ए-जाँ लम्हे से उफ़्ताद की ज़िद है

इकराम आज़म

ज़बाँ से दिल का फ़साना अदा किया न गया

इज्तिबा रिज़वी

ख़िरद को ख़ाना-ए-दिल का निगह-बाँ कर दिया हम ने

इज्तिबा रिज़वी

चुराने को चुरा लाया मैं जल्वे रू-ए-रौशन से

इज्तिबा रिज़वी

ख़िरद को ख़ाना-ए-दिल का निगह-बाँ कर दिया हम ने

इज्तिबा रिज़वी

इक अख़्गर-ए-जमाल फ़रोज़ाँ ब-शक्ल-ए-दिल

इज्तिबा रिज़वी

दिल है और ख़ुद नगरी ज़ौक़-ए-दुआ जिस को कहें

इज्तिबा रिज़वी

चुराने को चुरा लाया मैं जल्वे रू-ए-रौशन से

इज्तिबा रिज़वी

जुज़ क़ुर्बत-ए-जाँ पर्दा-ए-जाँ कोई नहीं था

इफ्तिखार शफ़ी

ये वस्ल की रुत है कि जुदाई का है मौसम

इफ़्तिख़ार राग़िब

तक़दीर-ए-वफ़ा का फूट जाना

इफ़्तिख़ार राग़िब

क्या बताऊँ दिल में किस की याद का

इफ़्तिख़ार राग़िब

एक मौसम की कसक है दिल में दफ़्न

इफ़्तिख़ार राग़िब

बे-सबब 'राग़िब' तड़प उठता है दिल

इफ़्तिख़ार राग़िब

वो कहते हैं कि आँखों में मिरी तस्वीर किस की है

इफ़्तिख़ार राग़िब

तर्क-ए-तअल्लुक़ात नहीं चाहता था मैं

इफ़्तिख़ार राग़िब

तक़दीर-ए-वफ़ा का फूट जाना

इफ़्तिख़ार राग़िब

फिर उठाया जाऊँगा मिट्टी में मिल जाने के बाद

इफ़्तिख़ार राग़िब

मुज़्तरिब आप के बिना है जी

इफ़्तिख़ार राग़िब

हो चराग़-ए-इल्म रौशन ठीक से

इफ़्तिख़ार राग़िब

इक बड़ी जंग लड़ रहा हूँ

इफ़्तिख़ार राग़िब

छोड़ा न मुझे दिल ने मिरी जान कहीं का

इफ़्तिख़ार राग़िब

चश्म-ए-तर को ज़बान कर बैठे

इफ़्तिख़ार राग़िब

चाहतों का सिलसिला है मुस्तक़िल

इफ़्तिख़ार राग़िब

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