दिल Poetry (page 337)

फ़रेब ग़म ही सही दिल ने आरज़ू कर ली

अंजुम आज़मी

हूर-ओ-ग़िल्माँ के तलबगार से वाक़िफ़ मैं हूँ

अंजुम अज़ीमाबादी

वो रूठता है कभी दिल दुखा भी देता है

अंजना संधीर

मुद्दत से कोई उन की तहरीर नहीं मिलती

अंजना संधीर

ऐ दो-जहाँ के मालिक आ'ला है नाम तेरा

अनीसा बेगम

लगा के दिल कोई कुछ पल अमीर रहता है

अनीस अब्र

हर एक पल मुझे दुख दर्द बे-शुमार मिले

अनीस अब्र

एक नज़्म

अनीस नागी

नक़ाब उल्टा है शम्ओं' ने सितारो तुम तो सो जाओ

अनीस कैफ़ी

ये ख़ाना हमेशा से वीरान है

अनीस अशफ़ाक़

म'अरका जब छिड़ गया तो क्या हुआ हम से सुनो

अनीस अशफ़ाक़

हमेशा किसी इम्तिहाँ में रहा

अनीस अशफ़ाक़

भर नहीं पाया अभी तक ज़ख़्म-ए-कारी हाए हाए

अनीस अंसारी

तिरे गेसुओं के साए में जो एक पल रहा हूँ

अनीस अहमद अनीस

नज़र मिलते ही साक़ी से गिरी इक बर्क़ सी दिल पर

अनीस अहमद अनीस

जो आईने से तेरी जल्वा-सामानी नहीं जाती

अनीस अहमद अनीस

देर लगी आने में तुम को शुक्र है फिर भी आए तो

अंदलीब शादानी

चाहत के बदले में हम बेच दें अपनी मर्ज़ी तक

अंदलीब शादानी

क्या कहिए रू-ए-हुस्न पे आलम नक़ाब का

अंदलीब शादानी

कोई अदा-शनास-ए-मोहब्बत हमें बताए

अंदलीब शादानी

हँसती आँखें हँसता चेहरा इक मजबूर बहाना है

अंदलीब शादानी

देर लगी आने में तुम को शुक्र है फिर भी आए तो

अंदलीब शादानी

तिरी जफ़ा को जफ़ा मैं तो कह नहीं सकता

आनंद नारायण मुल्ला

नज़र जिस की तरफ़ कर के निगाहें फेर लेते हो

आनंद नारायण मुल्ला

मैं फ़क़त इंसान हूँ हिन्दू मुसलमाँ कुछ नहीं

आनंद नारायण मुल्ला

दयार-ए-इश्क़ है ये ज़र्फ़-ए-दिल की जाँच होती है

आनंद नारायण मुल्ला

मोहिब्बान-ए-वतन का नारा

आनंद नारायण मुल्ला

ज़िंदगी गो कुश्ता-ए-आलाम है

आनंद नारायण मुल्ला

ये दिल आवेज़ी-ए-हयात न हो

आनंद नारायण मुल्ला

सर-ए-महशर यही पूछूँगा ख़ुदा से पहले

आनंद नारायण मुल्ला

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