दिल Poetry (page 335)

एक बे-नाम उदासी से भरा बैठा हूँ

अंजुम सलीमी

अध-बुने ख़्वाबों का अम्बार पड़ा है दिल में

अंजुम सलीमी

एक साकित रात का अज़ाब

अंजुम सलीमी

बे-मसरफ़ रिश्तों की फ़राग़त

अंजुम सलीमी

आधी मौत का जन्म

अंजुम सलीमी

ज़ुहूर-ए-कश्फ़-ओ-करामात में पड़ा हुआ हूँ

अंजुम सलीमी

सुल्ह के बअ'द मोहब्बत नहीं कर सकता मैं

अंजुम सलीमी

मैं ख़ुद को मिस्मार कर के मलबा बना रहा हूँ

अंजुम सलीमी

ख़ाक छानी न किसी दश्त में वहशत की है

अंजुम सलीमी

फ़लक-नज़ाद सही सर-निगूँ ज़मीं पे था मैं

अंजुम सलीमी

इक दूजे को देर से समझा देर से यारी की

अंजुम सलीमी

रहे ज़रा दिल-ए-ख़ूँ-गश्ता पर नज़र 'अंजुम'

अंजुम रूमानी

क़लंदरी है कि रखता है दिल ग़नी 'अंजुम'

अंजुम रूमानी

यहाँ तो फिर वही दीवार-ओ-दर निकल आए

अंजुम रूमानी

नहीं नाम-ओ-निशाँ साए का लेकिन यार बैठे हैं

अंजुम रूमानी

मौसम का आह-ओ-नाला से अंदाज़ा कीजिए

अंजुम रूमानी

कुछ अजनबी से लोग थे कुछ अजनबी से हम

अंजुम रूमानी

जब भी कोई बात की आँसू ढलके साथ

अंजुम रूमानी

हम से भी गाहे गाहे मुलाक़ात चाहिए

अंजुम रूमानी

हम से बात में पेच न डाल

अंजुम रूमानी

हर चंद उन्हें अहद फ़रामोश न होगा

अंजुम रूमानी

दुखी दिलों के लिए ताज़ियाना रखता है

अंजुम रूमानी

दिन हो कि रात, कुंज-ए-क़फ़स हो कि सेहन-ए-बाग़

अंजुम रूमानी

दिन हो कि रात कुंज-ए-क़फ़स हो कि सेहन-ए-बाग़

अंजुम रूमानी

रंग इस मौसम में भरना चाहिए

अंजुम रहबर

दिल भर आया फिर भी राज़-ए-दिल छुपाना ही पड़ा

अंजुम मानपुरी

अदू तो क्या ये फ़लक भी उसे सता न सका

अंजुम मानपुरी

पल भर उसे रुला कर देख

अंजुम लुधियानवी

जाने किस की आहट का इंतिज़ार करता है

अंजुम लुधियानवी

हँसी में टाल तो देता हूँ अक्सर

अंजुम ख़याली

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