दिल Poetry (page 336)

आज़ार मिरे दिल का दिल-आज़ार न हो जाए

अंजुम ख़याली

मिरे जुनूँ को हवस में शुमार कर लेगा

अंजुम ख़लीक़

कहाँ तक और इस दुनिया से डरते ही चले जाना

अंजुम ख़लीक़

जहाँ सीनों में दिल शानों पे सर आबाद होते हैं

अंजुम ख़लीक़

जब तक फ़सील-ए-जिस्म का दर खुल न जाएगा

अंजुम ख़लीक़

हम अपने ज़ौक़-ए-सफ़र को सफ़र सितारा करें

अंजुम ख़लीक़

दस्तार-ए-हुनर बख़्शिश-ए-दरबार नहीं है

अंजुम ख़लीक़

चाहे तू शौक़ से मुझे वहशत-ए-दिल शिकार कर

अंजुम ख़लीक़

सर-ए-राह मिल के बिछड़ गए था बस एक पल का वो हादसा

अंजुम इरफ़ानी

मिरी नज़र में आ गया है जब से इक सहीफ़ा-रुख़

अंजुम इरफ़ानी

ये रात ढलते ढलते रख गई जवाब के लिए

अंजुम इरफ़ानी

लहजे का रस हँसी की धनक छोड़ कर गया

अंजुम इरफ़ानी

जो न हों कुछ तशरीह-तलब कम होते हैं

अंजुम इरफ़ानी

इस ने देखा है सर-ए-बज़्म सितमगर की तरह

अंजुम इरफ़ानी

फ़सील-ए-जिस्म पे शब-ख़ूँ शरारतें तेरी

अंजुम इरफ़ानी

बड़ी फ़र्ज़-आश्ना है सबा करे ख़ूब काम हिसाब का

अंजुम इरफ़ानी

अब किसी अंधे सफ़र के लिए तय्यार हुआ चाहता है

अंजुम इरफ़ानी

अब इस सादा कहानी को नया इक मोड़ देना था

अंजुम इरफ़ानी

मुतमइन बैठा हूँ ख़ुद को जान कर

अंजुम फ़ौक़ी बदायूनी

किस का भेद कहाँ की क़िस्मत पगले किस जंजाल में है

अंजुम फ़ौक़ी बदायूनी

ज़हर लगता है ये आदत के मुताबिक़ मुझ को

अंजुम बाराबंकवी

ख़याल जान से बढ़ कर सफ़र में रहता है

अंजुम बाराबंकवी

हम सब को बताते रहते हैं ये बात पुरानी काम की है

अंजुम बाराबंकवी

दिल का गुलाब मैं ने जिसे चूम कर दिया

अंजुम बाराबंकवी

ख़ाली भी तो कर ख़ाना-ए-दिल दुनिया से

अंजुम आज़मी

ना-उमीदी कुफ़्र है

अंजुम आज़मी

वा'दा है कि जब रोज़-ए-जज़ा आएगा

अंजुम आज़मी

मेरी दुनिया में अभी रक़्स-ए-शरर होता है

अंजुम आज़मी

जो शब भर आँसुओं से तर रहेगा

अंजुम आज़मी

हम से क्या ख़ाक के ज़र्रों ही से पूछा होता

अंजुम आज़मी

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