दिल Poetry (page 48)
हुए थे भाग के पर्दे में तुम निहाँ क्यूँकर
मीर तस्कीन देहलवी
गर मेरे बैठने से वो आज़ार खींचते
मीर तस्कीन देहलवी
दिल किस की तेग़-ए-नाज़ से लज़्ज़त-चशीदा है
मीर तस्कीन देहलवी
बे-मेहर कहते हो उसे जो बेवफ़ा नहीं
मीर तस्कीन देहलवी
लब से सुनाऊँ हाल क्या दिल का मिरे हबीब
तासीर सिद्दीक़ी
दिल को क़रार मिलता है अक्सर चुभन के बा'द
तासीर सिद्दीक़ी
अच्छे हैं फ़ासले के ये तारे सजाते हैं
तासीर सिद्दीक़ी
ज़ेहन में हो कोई मंज़िल तो नज़र में ले जाऊँ
तसव्वुर ज़ैदी
शेर-दिल ख़ाँ
तसद्द्क़ हुसैन ख़ालिद
भटकें हैं आप के लिए तन्हा कहाँ कहाँ
तरुणा मिश्रा
अश्क टपकें लाख होंटों की हँसी जाती नहीं
तरुणा मिश्रा
आज ख़ुद को तबाह कर लेंगे
तरुणा मिश्रा
तू मेरा दोस्त मिरा यार है नहीं है क्या
तरकश प्रदीप
कोई रखता ही नहीं फिर भी रहा करता है
तरकश प्रदीप
ऐ मेरे दिल तू बता तुझ को गवारा क्या है
तरकश प्रदीप
नमी आँखों की बादा हो गई है
तारिक़ राशीद दरवेश
कौन से दिल से किन आँखों ये तमाशा देखूँ
तारिक़ राशीद दरवेश
ज़ेहन पर बोझ रहा, दिल भी परेशान हुआ
तारिक़ क़मर
जौन-एलिया से आख़री मुलाक़ात
तारिक़ क़मर
ज़ेहन पर बोझ रहा, दिल भी परेशान हुआ
तारिक़ क़मर
चश्म-ए-बीना! तिरे बाज़ार का मेआर हैं हम
तारिक़ क़मर
अपनी पलकों के शबिस्तान में रक्खा है तुम्हें
तारिक़ क़मर
ये वीरानी सी यूँही तो नहीं रहती है आँखों में
तारिक़ नईम
खोल देते हैं पलट आने पे दरवाज़ा-ए-दिल
तारिक़ नईम
मैं आ रहा था सितारों पे पाँव धरते हुए
तारिक़ नईम
जीना क्या है पिछ्ला क़र्ज़ उतार रहा हूँ
तारिक़ नईम
हवा में आए तो लौ भी न साथ ली हम ने
तारिक़ नईम
ऐसी तक़्सीम की सूरत निकल आई घर में
तारिक़ नईम
अगर कुछ भी मिरे घर से दम-ए-रुख़्सत निकलता है
तारिक़ नईम
अब ये हंगामा-ए-दुनिया नहीं देखा जाता
तारिक़ नईम
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