दिल Poetry (page 51)

नज़ारगी-ए-शौक़ ने दीदार में खींचा

तालीफ़ हैदर

आहिस्ता-रवी शहर को काहिल न बना दे

तालीफ़ हैदर

जुनूँ ने ज़हर का पियाला पिया आहिस्ता आहिस्ता

तलअत इशारत

एक आवाज़

तख़्त सिंह

भूली-बिसरी रात

तख़्त सिंह

मिरे ख़याल का साया जहाँ पड़ा होगा

तख़्त सिंह

हर अश्क तिरी याद का नक़्श-ए-कफ़-ए-पा है

तख़्त सिंह

एक एक क़तरा उस का शो'ला-फ़िशाँ सा है

तख़्त सिंह

दूर तक परछाइयाँ सी हैं रह-ए-अफ़्कार पर

तख़्त सिंह

उफ़ वो नज़र कि सब के लिए दिल-नवाज़ है

ताजवर नजीबाबादी

ग़म-ए-मोहब्बत में दिल के दाग़ों से रू-कश-ए-लाला-ज़ार हूँ मैं

ताजवर नजीबाबादी

दिल के पर्दों में छुपाया है तिरे इश्क़ का राज़

ताजवर नजीबाबादी

मोहब्बत में ज़ियाँ-कारी मुराद-ए-दिल न बन जाए

ताजवर नजीबाबादी

हुस्न-ए-शोख़-चश्म में नाम को वफ़ा नहीं

ताजवर नजीबाबादी

हश्र में फिर वही नक़्शा नज़र आता है मुझे

ताजवर नजीबाबादी

ग़म-ए-मोहब्बत में दिल के दाग़ों से रू-कश-ए-लाला-ज़ार हूँ मैं

ताजवर नजीबाबादी

ऐ आरज़ू-ए-शौक़ तुझे कुछ ख़बर है आज

ताजवर नजीबाबादी

तुम्हारी याद बढ़ी और दिल हुआ रौशन

ताजदार आदिल

ज़ख़्म कब का था दर्द उठा है अब

ताजदार आदिल

लब तक आया गिला हमेशा से

ताजदार आदिल

जो मिल गया है यहाँ जल्वा-ए-ख़याली है

ताजदार आदिल

काली घटा में चाँद ने चेहरा छुपा लिया

ताज सईद

बंद दरीचों के कमरे से पूर्वा यूँ टकराई है

ताज सईद

दिल तेरी नज़र की शह पा कर मिलने के बहाने ढूँढे है

ताज भोपाली

मुझ को कहानियाँ न सुना शहर को बचा

तैमूर हसन

मैं ने बख़्श दी तिरी क्यूँ ख़ता तुझे इल्म है

तैमूर हसन

हिज्र बख़्शा कभी विसाल दिया

तैमूर हसन

एक मंज़िल है एक जादा है

तैमूर हसन

फिर उस की याद ने दस्तक दिल-ए-हज़ीं पर दी

तहसीन फ़िराक़ी

ला-यख़ुल

तहसीन फ़िराक़ी

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