दिल Poetry (page 52)

तिरी गली में गए कितने माह ओ साल हुए

तहसीन फ़िराक़ी

मह-ओ-अंजुम ने क़बा की तो तुम्हारे लिए की

तहसीन फ़िराक़ी

इसे मैं और ये मेरा असा ही तय करेगा

तहसीन फ़िराक़ी

ख़्वाब डसते रहे बिखरते रहे

ताहिरा जबीन तारा

सुकून-ए-दिल में वो बन के जब इंतिशार उतरा तो मैं ने देखा

ताहिर फ़राज़

मिरी मंज़िलें कहीं और हैं मिरा रास्ता कोई और है

ताहिर फ़राज़

जब मिरे होंटों पे मेरी तिश्नगी रह जाएगी

ताहिर फ़राज़

अब के बरस होंटों से मेरे तिश्ना-लबी भी ख़त्म हुइ

ताहिर फ़राज़

रहता है ज़ेहन ओ दिल में जो एहसास की तरह

ताहिर अज़ीम

हर्फ़

ताहिर अज़ीम

ये जो शीशा है दिल-नुमा मुझ में

ताहिर अज़ीम

मौसम-ए-गुल बहार के दिन थे

ताहिर अज़ीम

मैं उस की मोहब्बत से इक दिन भी मुकर जाता

ताहिर अज़ीम

हर दर्द की दवा भी ज़रूरी नहीं कि हो

ताहिर अज़ीम

बुझ रही है आँख ये जिस्म है जुमूद में

ताहिर अदीम

आँखों में है कैसा पानी बंद है क्यूँ आवाज़

ताहिर अदीम

फ़ुरात-ए-चश्म पे है कर्बला की तुग़्यानी

तफ़ज़ील अहमद

तन्हा कर के मुझ को सलीब-ए-सवाल पे छोड़ दिया

तफ़ज़ील अहमद

हर अदा तुंद और नबात उस की

ताबिश सिद्दीक़ी

यादों की क़िंदील जलाना कितना अच्छा लगता है

ताबिश मेहदी

जहान-ए-दिल में सन्नाटा बहुत है

ताबिश मेहदी

तेरी सूरत निगाहों में फिरती रहे इश्क़ तेरा सताए तो मैं क्या करूँ

ताबिश कानपुरी

Dimensions

ताबिश कमाल

बे-घरी

ताबिश कमाल

ये शहर आफ़तों से तो ख़ाली कोई न था

ताबिश कमाल

हमारा डूबना मुश्किल नहीं था

ताबिश कमाल

यूँ नक़ाब-ए-रुख़ मुक़ाबिल से उठी

ताबिश देहलवी

मह-ओ-पर्वीं तह-ए-कमंद रहे

ताबिश देहलवी

हर इक दाग़-ए-दिल शम्अ' साँ देखता हूँ

ताबिश देहलवी

हमा-तन गोश इक ज़माना था

ताबिश देहलवी

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