दिल Poetry (page 54)

बस्ती में कमी किस चीज़ की है पत्थर भी बहुत शीशे भी बहुत

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

यहाँ यार और बरदार कोई नहीं किसी का

ताबाँ अब्दुल हई

तू मिल उस से हो जिस से दिल तिरा ख़ुश

ताबाँ अब्दुल हई

न थे आशिक़ किसी बे-दाद पर हम जब तलक 'ताबाँ'

ताबाँ अब्दुल हई

मुझे आता है रोना ऐसी तन्हाई पे ऐ 'ताबाँ'

ताबाँ अब्दुल हई

मोहब्बत तू मत कर दिल उस बेवफ़ा से

ताबाँ अब्दुल हई

मैं तो तालिब दिल से हूँगा दीन का

ताबाँ अब्दुल हई

महफ़िल के बीच सुन के मिरे सोज़-ए-दिल का हाल

ताबाँ अब्दुल हई

किस किस तरह की दिल में गुज़रती हैं हसरतें

ताबाँ अब्दुल हई

हवा भी इश्क़ की लगने न देता मैं उसे हरगिज़

ताबाँ अब्दुल हई

दिल की हसरत न रही दिल में मिरे कुछ बाक़ी

ताबाँ अब्दुल हई

आता नहीं वो यार-ए-सितमगर तो क्या हुआ

ताबाँ अब्दुल हई

यार से अब के गर मिलूँ 'ताबाँ'

ताबाँ अब्दुल हई

याँ तलक के है तिरे हिज्र में फ़रियाद कि बस

ताबाँ अब्दुल हई

तू मिल उस से हो जिस से दिल तिरा ख़ुश

ताबाँ अब्दुल हई

तू भली बात से ही मेरी ख़फ़ा होता है

ताबाँ अब्दुल हई

सुन फ़स्ल-ए-गुल ख़ुशी हो गुलशन में आइयाँ हैं

ताबाँ अब्दुल हई

रोया न हूँ जहाँ में गरेबाँ को अपने फाड़

ताबाँ अब्दुल हई

क़फ़स से छूटने की कब हवस है

ताबाँ अब्दुल हई

नहीं कोई दोस्त अपना यार अपना मेहरबाँ अपना

ताबाँ अब्दुल हई

मुझे ऐश ओ इशरत की क़ुदरत नहीं है

ताबाँ अब्दुल हई

मिरा ख़ुर्शीद-रू सब माह-रूयाँ बीच यक्का है

ताबाँ अब्दुल हई

मरने की मुझ को आप से हैं इज़तिराबियाँ

ताबाँ अब्दुल हई

लड़का जो ख़ूब-रू है सो मुझ से बचा नहीं

ताबाँ अब्दुल हई

किसी का काम दिल इस चर्ख़ से हुआ भी है

ताबाँ अब्दुल हई

किसी गुल में नहीं पाने की तू बू-ए-वफ़ा हरगिज़

ताबाँ अब्दुल हई

किस से पूछूँ हाए मैं इस दिल के समझाने की तरह

ताबाँ अब्दुल हई

ख़ूब-रू जो एक का महबूब नहीं

ताबाँ अब्दुल हई

खोता ही नहीं है हवस-ए-मतअम-ओ-मलबस

ताबाँ अब्दुल हई

कई दिन हो गए या-रब नहीं देखा है यार अपना

ताबाँ अब्दुल हई

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.