दिल Poetry (page 72)

कौन कहता है जफ़ा करते हो तुम

सिराज औरंगाबादी

कल सीं बे-कल है मिरा जी यार कूँ देखा न था

सिराज औरंगाबादी

कहाँ है गुल-बदन मोहन पियारा

सिराज औरंगाबादी

काफ़िर हुआ हूँ रिश्ता-ए-ज़ुन्नार की क़सम

सिराज औरंगाबादी

कभी तुम मोल लेने हम कूँ हँस हँस भाव करते हो

सिराज औरंगाबादी

जो तुझे देख के मबहूत हुआ

सिराज औरंगाबादी

जो कुछ कि तुम सीं मुझे बोलना था बोल चुका

सिराज औरंगाबादी

जिस ने तुझ हुस्न पर निगाह किया

सिराज औरंगाबादी

जिस कूँ तुझ ग़म सीं दिल-शिगाफ़ी है

सिराज औरंगाबादी

जिस कूँ पियो के हिज्र का बैराग है

सिराज औरंगाबादी

जिस दिन सीं मैं यार बूझता हूँ

सिराज औरंगाबादी

जब सीं देखा हूँ यार की सूरत

सिराज औरंगाबादी

जब सें तुझ इश्क़ की गरमी का असर है मन में

सिराज औरंगाबादी

जानाँ पे जी निसार हुआ क्या बजा हुआ

सिराज औरंगाबादी

जान ओ दिल सीं मैं गिरफ़्तार हूँ किन का उन का

सिराज औरंगाबादी

जान जाता है अब तो आ जानी

सिराज औरंगाबादी

इश्क़ ने ख़ूँ किया है दिल जिस का

सिराज औरंगाबादी

इश्क़ में अव्वल फ़ना दरकार है

सिराज औरंगाबादी

इश्क़ में आ कि अक़्ल कूँ खोनाँ

सिराज औरंगाबादी

इस लब कूँ कब पसंद हैं रस्मी कटोरियाँ

सिराज औरंगाबादी

हम हैं मुश्ताक़-ए-जवाब और तुम हो उल्फ़त सीं बईद

सिराज औरंगाबादी

हुआ हूँ इन दिनों माइल किसी का

सिराज औरंगाबादी

हर किसी कूँ गुज़र-ए-इश्क़ में आनाँ मुश्किल

सिराज औरंगाबादी

हर हर वरक़ पे क्यूँ कि लिखूँ दास्तान-ए-हिज्र

सिराज औरंगाबादी

हमारी आँखों की पुतलियों में तिरा मुबारक मक़ाम हैगा

सिराज औरंगाबादी

हमारे पास जानाँ आन पहुँचा

सिराज औरंगाबादी

हमारा दिलबर-ए-गुलफ़म आया

सिराज औरंगाबादी

है दिल में ख़याल-ए-गुल-ए-रुख़्सार किसी का

सिराज औरंगाबादी

ग़म-ए-आहिस्ता-रौ याँ रफ़्ता रफ़्ता

सिराज औरंगाबादी

फ़िदा कर जान अगर जानी यही है

सिराज औरंगाबादी

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