दिल Poetry (page 71)

तिरी निगाह की अनियाँ जिगर में सलियाँ हैं

सिराज औरंगाबादी

तेरे अबरू की अजब बैत है हाली ऐ शोख़

सिराज औरंगाबादी

सुनो तो ख़ूब है टुक कान धर मेरा सुख़न प्यारे

सिराज औरंगाबादी

सुने रातों कूँ गर जंगल में मेरे ग़म की वावैला

सिराज औरंगाबादी

सीना-साफ़ी की है जिसे ऐनक

सिराज औरंगाबादी

सीमाब जल गया तो उसे गर्द बोलिए

सिराज औरंगाबादी

शर्बत-ए-वस्ल पिला जा लब-ए-शीरीं की क़सम

सिराज औरंगाबादी

सर्व-ए-गुलशन पर सुख़न उस क़द का बाला हो गया

सिराज औरंगाबादी

सनम ख़ुश तबईयाँ सीखे हो तुम किन किन ज़रीफ़ों सीं

सिराज औरंगाबादी

सनम जब चीरा-ए-ज़र-तार बाँधे

सिराज औरंगाबादी

रिश्ते में तिरी ज़ुल्फ़ के है जान हमारा

सिराज औरंगाबादी

क़द तिरा सर्व-ए-रवाँ था मुझे मालूम न था

सिराज औरंगाबादी

पुर-ख़ूँ है जिगर लाला-ए-सैराब की सौगंद

सिराज औरंगाबादी

पीव के आने का वक़्त आया है

सिराज औरंगाबादी

पी कर शराब-ए-शौक़ कूँ बेहोश हो बेहोश हो

सिराज औरंगाबादी

नयन की पुतली में ऐ सिरीजन तिरा मुबारक मक़ाम दिस्ता

सिराज औरंगाबादी

मुस्कुरा कर आशिक़ों पर मेहरबानी कीजिए

सिराज औरंगाबादी

मुझ पर ऐ महरम-ए-जाँ पर्दा-ए-असरार कूँ खोल

सिराज औरंगाबादी

मुझ दर्द सें यार आश्ना नईं

सिराज औरंगाबादी

मेरे जिगर के दर्द का चारा कब आएगा

सिराज औरंगाबादी

मिरा दिल नहीं है मेरे हात तुम बिन

सिराज औरंगाबादी

मिरा दिल आ गया झट-पट झपट में

सिराज औरंगाबादी

मज्लिस-ए-ऐश गर्म हो या-रब

सिराज औरंगाबादी

मैं न जाना था कि तू यूँ बे-वफ़ा हो जाएगा

सिराज औरंगाबादी

महरम-ए-दिल हुआ वो सहरा वा

सिराज औरंगाबादी

क्यूँ तिरे गेसू कूँ गेसू बोलनाँ

सिराज औरंगाबादी

क्या बला का है नशा इश्क़ के पैमाने में

सिराज औरंगाबादी

ख़ूब बूझा हूँ मैं उस यार कूँ कुइ क्या जाने

सिराज औरंगाबादी

ख़ाक हूँ ए'तिबार की सौगंद

सिराज औरंगाबादी

ख़बर-ए-तहय्युर-ए-इश्क़ सुन न जुनूँ रहा न परी रही

सिराज औरंगाबादी

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