दिल Poetry (page 73)

फ़स्ल-ए-गुल का ग़म दिल-ए-नाशाद पर बाक़ी रहा

सिराज औरंगाबादी

फ़जर उठ यार का दीदार करनाँ

सिराज औरंगाबादी

दो-रंगी ख़ूब नईं यक-रंग हो जा

सिराज औरंगाबादी

दिन-ब-दिन अब लुत्फ़ तेरा हम पे कम होने लगा

सिराज औरंगाबादी

दिलदार की कशिश ने ऐंचा है मन हमारा

सिराज औरंगाबादी

दिल मिरा साग़र-ए-शिकायत है

सिराज औरंगाबादी

दिल में जब आ के इश्क़ ने तेरे महल किया

सिराज औरंगाबादी

देखा है जिस ने यार के रुख़्सार की तरफ़

सिराज औरंगाबादी

चराग़-ए-मह सीं रौशन-तर है हुस्न-ए-बे-मिसाल उस का

सिराज औरंगाबादी

भरा कमाल-ए-वफ़ा सें ख़याल का शीशा

सिराज औरंगाबादी

बात कर दिल सती हिजाब निकाल

सिराज औरंगाबादी

अव्वल सीं दिल मिरा जो गिरफ़्तार था सो है

सिराज औरंगाबादी

अपना जमाल मुझ कूँ दिखाया रसूल आज

सिराज औरंगाबादी

ऐ दोस्त तलत्तुफ़ सीं मिरे हाल कूँ आ देख

सिराज औरंगाबादी

ऐ दिल-ए-बे-अदब उस यार की सौगंद न खा

सिराज औरंगाबादी

ऐ बाग़-ए-हया दिल की गिरह खोल सुख़न बोल

सिराज औरंगाबादी

अग़्यार छोड़ मुझ सें अगर यार होवेगा

सिराज औरंगाबादी

अदा-ए-दिल-फ़रेब-ए-सर्व-क़ामत

सिराज औरंगाबादी

आया पिया शराब का प्याला पिया हुआ

सिराज औरंगाबादी

आलम के दोस्तों में मुरव्वत नहीं रही

सिराज औरंगाबादी

तोड़े बग़ैर संग तराशे न जाएँगे

सिरज़ अालम ज़ख़मी

सदा-ए-दिल को कहीं बारयाब होना था

सिरज़ अालम ज़ख़मी

कहाँ तलक तिरी यादों से तख़लिया कर लें

सिरज़ अालम ज़ख़मी

बहुत उदास है दिल जाने माजरा क्या है

सिरज़ अालम ज़ख़मी

ये तग़य्युर रू-नुमा हो जाएगा सोचा न था

सिराज अजमली

ब-ज़ाहिर जो नज़र आते हो तुम मसरूर ऐसा कैसे करते हो

सिराज अजमली

बहार आए तो ख़ुद ही लाला ओ नर्गिस बता देंगे

सिकंदर अली वज्द

तिरे आते ही सब दुनिया जवाँ मालूम होती है

सिकंदर अली वज्द

शौक़ की नुक्ता-दानियाँ न गईं

सिकंदर अली वज्द

शमीम-ए-ज़ुल्फ़-ए-यार आए न आए

सिकंदर अली वज्द

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