दिया Poetry (page 79)

मिरे बस में या तो या-रब वो सितम-शिआर होता

अमीर मीनाई

कहा जो मैं ने कि यूसुफ़ को ये हिजाब न था

अमीर मीनाई

वो मारका कि आज भी सर हो नहीं सका

अमीर इमाम

वो मारका कि आज भी सर हो नहीं सका

अमीर इमाम

काँधों से ज़िंदगी को उतरने नहीं दिया

अमीर इमाम

पुल

अमीक़ हनफ़ी

दिल है वीरान बयाबाँ की तरह

अमीक़ हनफ़ी

अर्ज़-ए-मुद्दआ करते क्यूँ नहीं किया हम ने

अमीक़ हनफ़ी

जो दुहाई दे रहा है कोई सौदाई न हो

अमीन राहत चुग़ताई

अफ़्साना-ए-हयात को दोहरा रहा हूँ मैं

अमीन हज़ीं

रख दिया मैं ने दर-ए-हुस्न पे हारा हुआ इश्क़

अमीन अडीराई

इक अश्क सर-ए-शोख़ी-ए-रुख़सार में गुम है

अमीन अडीराई

वहशत

अम्बरीन सलाहुद्दीन

वो मसीहा न बना हम ने भी ख़्वाहिश नहीं की

अंबरीन हसीब अंबर

सितारा-बार बन जाए नज़र ऐसा नहीं होता

अंबरीन हसीब अंबर

ख़ुशी का लम्हा रेत था सो हाथ से निकल गया

अंबरीन हसीब अंबर

हो गई बात पुरानी फिर भी

अंबरीन हसीब अंबर

रंग काला है न है पैकर सियाह

अम्बर शमीम

ज़माने-भर से जुदा और बा-कमाल कोई

अम्बर खरबंदा

भूला हूँ मैं आलम को सरशार इसे कहते हैं

अमानत लखनवी

कौन उतरा नज़र के ज़ीने से

अल्ताफ़ मशहदी

नशात-ए-उमीद

अल्ताफ़ हुसैन हाली

मुनाजात-ए-बेवा

अल्ताफ़ हुसैन हाली

मिट्टी का दिया

अल्ताफ़ हुसैन हाली

मेडिकल टेस्ट

अल्ताफ़ हुसैन हाली

हुब्ब-ए-वतन

अल्ताफ़ हुसैन हाली

बरखा-रुत

अल्ताफ़ हुसैन हाली

मैं तो मैं ग़ैर को मरने से अब इंकार नहीं

अल्ताफ़ हुसैन हाली

कर के बीमार दी दवा तू ने

अल्ताफ़ हुसैन हाली

जीते जी मौत के तुम मुँह में न जाना हरगिज़

अल्ताफ़ हुसैन हाली

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