दिया Poetry (page 77)

एक क़दीम ख़याली की निगरानी में

अंजुम सलीमी

एक महबूस नज़्म

अंजुम सलीमी

बे-मसरफ़ रिश्तों की फ़राग़त

अंजुम सलीमी

आधी मौत का जन्म

अंजुम सलीमी

उम्र की सारी थकन लाद के घर जाता हूँ

अंजुम सलीमी

सुल्ह के बअ'द मोहब्बत नहीं कर सकता मैं

अंजुम सलीमी

खींचा हुआ है गर्दिश-ए-अफ़्लाक ने मुझे

अंजुम सलीमी

ख़ाक छानी न किसी दश्त में वहशत की है

अंजुम सलीमी

कैसी सोहबत है कैसी तन्हाई

अंजुम सलीमी

काग़ज़ था मैं दिए पे मुझे रख दिया गया

अंजुम सलीमी

जस्त भरता हुआ फ़र्दा के दहाने की तरफ़

अंजुम सलीमी

दफ़ना दिया गया मुझे चाँदी की क़ब्र में

अंजुम रहबर

दफ़ना दिया गया मुझे चाँदी की क़ब्र में

अंजुम रहबर

मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था

अंजुम रहबर

हज़ारों साल चलने कि सज़ा है

अंजुम लुधियानवी

घर में मिट्टी का दिया मौजूद है

अंजुम ख़याली

यही तुम पर भी खुलना है

अंजुम ख़लीक़

हम अपने ज़ौक़-ए-सफ़र को सफ़र सितारा करें

अंजुम ख़लीक़

तेशा-ब-कफ़ को आइना-गर कह दिया गया

अंजुम इरफ़ानी

कुछ तो नया किया है हवा ने पता करो

अंजुम बाराबंकवी

दिल का गुलाब मैं ने जिसे चूम कर दिया

अंजुम बाराबंकवी

बनाए सब ने इसी ख़ाक से दिए अपने

अंजुम अंसारी

बाग़ में रह के बहारों को निभाना होगा

अंजुम अंसारी

ख़ामोशी का शहर

अनीस नागी

एक नज़्म

अनीस नागी

एक नज़्म

अनीस नागी

भर नहीं पाया अभी तक ज़ख़्म-ए-कारी हाए हाए

अनीस अंसारी

क्या कहिए रू-ए-हुस्न पे आलम नक़ाब का

अंदलीब शादानी

'मुल्ला' बना दिया है इसे भी महाज़-ए-जंग

आनंद नारायण मुल्ला

ज़माने की कशाकश का दिया पैहम पता मुझ को

अम्न लख़नवी

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