दिया Poetry (page 75)

तुम्हारे जम्परों पर साड़ियों पर और ग़रारों पर

अरशद मीर

ऐ दिल तिरे तुफ़ैल जो मुझ पर सितम हुए

अरशद कमाल

सपेदी रंग-ए-जहाँ में नहीं मिलाता हूँ

अरशद जमाल हश्मी

आँखों में ख़्वाब रख दिए ता'बीर छीन ली

अरशद जमाल हश्मी

यार की फ़र्त-ए-नज़ाकत का हूँ मैं शुक्र-गुज़ार

अरशद अली ख़ान क़लक़

जब हुआ गर्म-ए-कलाम-ए-मुख़्तसर महका दिया

अरशद अली ख़ान क़लक़

तासीर जज़्ब मस्तों की हर हर ग़ज़ल में है

अरशद अली ख़ान क़लक़

सैर करते उसे देखा है जो बाज़ारों में

अरशद अली ख़ान क़लक़

रग-ओ-पै में भरा है मेरे शोर उस की मोहब्बत का

अरशद अली ख़ान क़लक़

परतव-ए-रुख़ का तिरे दिल में गुज़र रहता है

अरशद अली ख़ान क़लक़

परतव पड़ा जो आरिज़-ए-गुलगून-ए-यार का

अरशद अली ख़ान क़लक़

लूटे मज़े जो हम ने तुम्हारे उगाल के

अरशद अली ख़ान क़लक़

जो साक़िया तू ने पी के हम को दिया है जाम-ए-शराब आधा

अरशद अली ख़ान क़लक़

दफ़्तर जो गुलों के वो सनम खोल रहा है

अरशद अली ख़ान क़लक़

चश्मक-ज़नी में करती नहीं यार का लिहाज़

अरशद अली ख़ान क़लक़

बुत-परस्ती ने किया आशिक़-ए-यज़्दाँ मुझ को

अरशद अली ख़ान क़लक़

बुत-परस्ती ने किया आशिक़-ए-यज़्दाँ मुझ को

अरशद अली ख़ान क़लक़

बशर के फ़ैज़-ए-सोहबत से लियाक़त आ ही जाती है

अरशद अली ख़ान क़लक़

लकीर-ए-संग को अन्क़ा-मिसाल हम ने किया

अरशद अब्दुल हमीद

घटाएँ घिरती हैं बिजली कड़क के गिरती है

अरशद अब्दुल हमीद

मेरे प्यारे वतन

अर्श मलसियानी

ज़ख़्म-ए-दिल भी दिखा के देख लिया

अर्श मलसियानी

तू अगर दिल में एक बार आए

अर्श मलसियानी

रहगुज़र रहगुज़र से पूछ लिया

अर्श मलसियानी

हिना-रंग हाथों में

अरमान नज्मी

तू ज़मीं पर है कहकशाँ जैसा

आरिफ़ शफ़ीक़

बादबाँ को गिला हवाओं से

आरिफ़ शफ़ीक़

मुझ को जन्नत से उठा कर ये कहाँ फेंक दिया

आरिफ़ अंसारी

अपने अहबाब को अशआ'र सुनाने निकला

आरिफ़ अंसारी

नज़र गुम हो गई जल्वों में 'आरिफ़'

आरिफ़ अब्बासी

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