दोस्त Poetry (page 26)

हलाकत-ए-दिल-ए-नाशाद राएगाँ भी नहीं

अज़हर सईद

मिलते जुलते हैं यहाँ लोग ज़रूरत के लिए

अज़हर नवाज़

जाने आया था क्यूँ मकान से मैं

अज़हर इनायती

गुज़रे हुए लम्हात को अब ढूँड रहा हूँ

अज़हर हाश्मी

हवा-ए-तेज़ के आगे कहाँ रहेगा कोई

अज़हर अब्बास

फ़ज़ा-ए-नीलगूँ का ध्यान छोड़ दे

अज़हर अब्बास

फिर इस के बा'द का कोई न हो गुज़र मुझ में

आज़ाद गुलाटी

सितम-दोस्त फ़िक्र-ए-अदावत कहाँ तक

आज़ाद अंसारी

न पूछो कौन हैं क्यूँ राह में नाचार बैठे हैं

आज़ाद अंसारी

अब कोई और मुसीबत तो न पाली जाए

औरंगज़ेब

बहुत छोटे हैं मुझ से मेरे दुश्मन

अतहर नफ़ीस

सुकूत-ए-शब से इक नग़्मा सुना है

अतहर नफ़ीस

किसी ने भेजा है ख़त प्यार और वफ़ा लिख कर

अतीक़ अंज़र

वक़्त ने लूटे हैं हस्ती के ख़ज़ाने कितने

अतीब एजाज़

वैसे तो इस घर को उस ने चाहे कम ख़ुश-हाली दी

अताउल हसन

किसी और को मैं तिरे सिवा नहीं चाहता

अताउल हसन

ख़्वाब की दिल्ली

अता आबिदी

नौ-जवान से

असरार-उल-हक़ मजाज़

इंक़लाब

असरार-उल-हक़ मजाज़

एक जिला-वतन की वापसी

असरार-उल-हक़ मजाज़

आवारा

असरार-उल-हक़ मजाज़

क़रीब आ के भी इक शख़्स हो सका न मिरा

असलम कोलसरी

हमारी जीत हुई है कि दोनों हारे हैं

असलम कोलसरी

रफ़ीक़ दोस्त मुहिब मुझ को शाक़ सब ही थे

असलम हनीफ़

न देख मुझ को मोहब्बत की आँख से ऐ दोस्त

असलम फ़र्रुख़ी

मैं सोचता हूँ कहीं तू ख़फ़ा न हो जाए

असलम फ़र्रुख़ी

मुझे तो ये भी फ़रेब-ए-हवास लगता है

असलम अंसारी

अपनी सदा की गूँज ही तुझ को डरा न दे

असलम अंसारी

मिलने को तुझ से दिल तो मिरा बे-क़रार है

आसिफ़ुद्दौला

अजनबी मुझ से आ गले मिल ले

आसिफ़ रज़ा

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