शोक Poetry (page 141)

उस ने तोड़ा जहाँ कोई पैमाँ

अहमद ज़फ़र

सियाह रात की हर दिलकशी को भूल गए

अहमद ज़फ़र

जब तक जुनूँ जुनूँ है ग़म-ए-आगही भी है

अहमद ज़फ़र

आसमाँ की आँख सूरज चाँद बीनाई भी है

अहमद ज़फ़र

फिर इस के ब'अद पत्थर हो गया आँखों का पानी

अहमद शनास

मोहब्बतों को कहीं और पाल कर देखो

अहमद शनास

नए ज़मानों की चाप तो सर पे आ खड़ी थी

अहमद शहरयार

ग़म-ए-हबीब ग़म-ए-ज़िंदगी ग़म-ए-दौराँ

अहमद रियाज़

फ़र्त-ए-ग़म-ए-हवादिस-ए-दौराँ के बावजूद

अहमद रियाज़

ज़िंदगी ग़म की आँच सह कोई

अहमद रियाज़

क्या क्या मोहब्बतों के ज़माने बदल गए

अहमद रियाज़

क्या क्या मोहब्बतों के ज़माने बदल गए

अहमद रियाज़

ब-वस्फ़-ए-शौक़ भी दिल का कहा नहीं करते

अहमद रियाज़

ब वस्फ़-ए-शौक़ भी दिल का कहा नहीं करते

अहमद रियाज़

मिरे हबीब मिरी मुस्कुराहटों पे न जा

अहमद राही

सरगोशी

अहमद राही

ग़म-गुसारी

अहमद राही

दर्द-ए-मुश्तरक

अहमद राही

ये दास्तान-ए-ग़म-ए-दिल कहाँ कही जाए

अहमद राही

क़याम-ए-दैर-ओ-तवाफ़-ए-हरम नहीं करते

अहमद राही

मैं दिल-ज़दा हूँ अगर दिल-फ़िगार वो भी हैं

अहमद राही

लम्हा लम्हा शुमार कौन करे

अहमद राही

कोई माज़ी के झरोकों से सदा देता है

अहमद राही

कभी तिरी कभी अपनी हयात का ग़म है

अहमद राही

कभी हयात का ग़म है कभी तिरा ग़म है

अहमद राही

ग़म-ए-हयात में कोई कमी नहीं आई

अहमद राही

दिल पे जब दर्द की उफ़्ताद पड़ी होती है

अहमद राही

दिल के सुनसान जज़ीरों की ख़बर लाएगा

अहमद राही

आम है कूचा-ओ-बाज़ार में सरकार की बात

अहमद राही

ग़म-ए-जानाँ ग़म-ए-दौराँ की तरफ़ यूँ आया

अहमद नदीम क़ासमी

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