शोक Poetry (page 139)

वक़्त-ए-सफ़र क़रीब है बिस्तर समेट लूँ

अजमल अजमली

तिरी नज़र भी नहीं हर्फ़-ए-मुद्दआ भी नहीं

अजमल अजमली

शहर शहर ढूँड आए दर-ब-दर पुकार आए

अजमल अजमली

महव-ए-हैरत हूँ ख़राश-ए-दस्त-ए-ग़म को देख कर

आजिज़ मातवी

यूँ तुझ से दूर दूर रहूँ ये सज़ा न दे

आजिज़ मातवी

जब कभी मद्द-ए-मुक़ाबिल वो रुख़-ए-ज़ेबा हुआ

आजिज़ मातवी

दर्द-ए-मुसलसल से आहों में पैदा वो तासीर हुई

आजिज़ मातवी

गुज़रे जिधर से नूर बिखेरे चले गए

अजीत सिंह हसरत

वही हैं क़त्ल-ओ-ग़ारत और वही कोहराम है साक़ी

अजय सहाब

बिखरा हूँ जब मैं ख़ुद यहाँ कोई मुझे गिराए क्यूँ

अजय सहाब

अश्कों से कब मिटे हैं दामन के दाग़ यारो

अजय सहाब

पहले ग़म-ए-फ़ुर्क़त के ये तेवर तो नहीं थे

ऐतबार साजिद

मुख़्तलिफ़ अपनी कहानी है ज़माने भर से

ऐतबार साजिद

जुदाइयों की ख़लिश उस ने भी न ज़ाहिर की

ऐतबार साजिद

भीड़ है बर-सर-ए-बाज़ार कहीं और चलें

ऐतबार साजिद

वो पहली जैसी वहशतें वो हाल ही नहीं रहा

ऐतबार साजिद

तिलिस्म-ज़ार-ए-शब-ए-माह में गुज़र जाए

ऐतबार साजिद

तिरे जैसा मेरा भी हाल था न सुकून था न क़रार था

ऐतबार साजिद

फूल थे रंग थे लम्हों की सबाहत हम थे

ऐतबार साजिद

कहा तख़्लीक़-ए-फ़न बोले बहुत दुश्वार तो होगी

ऐतबार साजिद

कभी तू ने ख़ुद भी सोचा कि ये प्यास है तो क्यूँ है

ऐतबार साजिद

धड़कन धड़कन यादों की बारात अकेला कमरा

ऐतबार साजिद

छोटे छोटे से मफ़ादात लिए फिरते हैं

ऐतबार साजिद

भीड़ है बर-सर-ए-बाज़ार कहीं और चलें

ऐतबार साजिद

बहुत सजाए थे आँखों में ख़्वाब मैं ने भी

ऐतबार साजिद

आँखों से अयाँ ज़ख़्म की गहराई तो अब है

ऐतबार साजिद

फूल अल्लाह ने बनाए हैं महकने के लिए

ऐश देहलवी

न छोड़ी ग़म ने मिरे इक जिगर में ख़ून की बूँद

ऐश देहलवी

मैं बुरा ही सही भला न सही

ऐश देहलवी

जो होता आह तिरी आह-ए-बे-असर में असर

ऐश देहलवी

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.