हाथ Poetry (page 27)

तौजीह

साक़ी फ़ारुक़ी

सुर्ख़ गुलाब और बदर-ए-मुनीर

साक़ी फ़ारुक़ी

शेर-इमदाद-अली का मेडक

साक़ी फ़ारुक़ी

मुर्दा-ख़ाना

साक़ी फ़ारुक़ी

एक सुअर से

साक़ी फ़ारुक़ी

यहीं कहीं पे कभी शोला-कार मैं भी था

साक़ी फ़ारुक़ी

दामन में आँसुओं का ज़ख़ीरा न कर अभी

साक़ी फ़ारुक़ी

आईना-दिल दाग़-ए-तमन्ना के लिए था

समद अंसारी

आहटों से दिमाग़ जलता है

समद अंसारी

मैं तुझ से लाख बिछड़ कर यहाँ वहाँ जाता

सलमान अख़्तर

क्या दिखाता है ये सफ़र देखो

सलमान अख़्तर

दिल में औरों के लिए कीना-ओ-कद रखते हैं

सलीम शुजाअ अंसारी

हुदूद-ए-शहर-ए-तिलिस्मात से नहीं निकला

सालिम सलीम

दालान में कभी कभी छत पर खड़ा हूँ मैं

सालिम सलीम

मंज़र-ए-ख़ेमा-ए-शब देखने वाला होगा

सलीम सिद्दीक़ी

सूरज ज़मीं की कोख से बाहर भी आएगा

सलीम शाहिद

रास्ता चाहिए दरिया की फ़रावानी को

सलीम शाहिद

ख़्वाहिश को अपने दर्द के अंदर समेट ले

सलीम शाहिद

इन दर-ओ-दीवार की आँखों से पट्टी खोल कर

सलीम शाहिद

हर्फ़-ए-बे-मतलब की मैं ने किस क़दर तफ़्सीर की

सलीम शाहिद

फ़र्श-ए-ज़मीं पे बर्ग-ए-ख़िज़ानी का रंग है

सलीम शाहिद

बुझ गए शो'ले धुआँ आँखों को पानी दे गया

सलीम शाहिद

सफ़र से आए तो फिर इक सफ़र नसीब हुआ

सलीम सरफ़राज़

पुराने साहिलों पर नया गीत

सलीम कौसर

वुसअत है वही तंगी-अफ़्लाक वही है

सलीम कौसर

तुम ने सच बोलने की जुरअत की

सलीम कौसर

सफ़र की इब्तिदा हुई कि तेरा ध्यान आ गया

सलीम कौसर

क्या बताएँ फ़स्ल-ए-बे-ख़्वाबी यहाँ बोता है कौन

सलीम कौसर

कोई याद ही रख़्त-ए-सफ़र ठहरे कोई राहगुज़र अनजानी हो

सलीम कौसर

कोई सच्चे ख़्वाब दिखाता है पर जाने कौन दिखाता है

सलीम कौसर

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