हाथ Poetry (page 25)

उठ गई उस की नज़र मैं जो मुक़ाबिल से उठा

शाद आरफ़ी

मयस्सर जिन की नज़रों को तिरे गेसू के साए हैं

शाद आरफ़ी

चाहते हैं घर बुतों के दिल में हम

शाद आरफ़ी

अजीब शाम थी जब लौट कर मैं घर आया

सीमान नवेद

ज़ात की दीवार बीचों-बीच इक दर वा हुआ

सीमाब ज़फ़र

कौन दरवाज़ा खुला रखता बराए इंतिज़ार

सीमाब ज़फ़र

फिर आ गया ज़बाँ पे वही नाम क्या करें

सीमाब सुल्तानपुरी

किताब-ए-उम्र में इक वो भी बाब होता है

सीमाब सुल्तानपुरी

शायद जगह नसीब हो उस गुल के हार में

सीमाब अकबराबादी

मुरत्तब हो के इक महशर ग़ुबार-ए-दिल से निकलेगा

सीमाब अकबराबादी

ख़ुद उठ के हाथ मेरे गरेबाँ में आ गए

सीमाब अकबराबादी

बड़ी दिलचस्पियों से सुब्ह-ए-शाम-ए-ज़िंदगी होगी

सीमाब अकबराबादी

मआल-ए-इशक़-ओ-मुहब्बत से आश्ना तो नहीं

सय्यद आशूर काज़मी

हर किसी आँख का बदला हुआ मंज़र होगा

साईल इमरान

दुनिया ने सच को झूट कहा कुछ नहीं हुआ

सय्यद सफ़ी हसन

जो भी तख़्त पे आ कर बैठा उस को यज़्दाँ मान लिया

सय्यद नसीर शाह

सियाह रात के दरिया को पार करते चलो

सौरभ शेखर

मिला न खेत से उस को भी आब-ओ-दाना क्या

सौरभ शेखर

क्या करूँगा ले के वाइज़ हाथ से हूरों के जाम

मोहम्मद रफ़ी सौदा

कैफ़िय्यत-ए-चश्म उस की मुझे याद है 'सौदा'

मोहम्मद रफ़ी सौदा

तुझ बिन बहुत ही कटती है औक़ात बे-तरह

मोहम्मद रफ़ी सौदा

जो गुल है याँ सो उस गुल-ए-रुख़्सार साथ है

मोहम्मद रफ़ी सौदा

गर कीजिए इंसाफ़ तो की ज़ोर वफ़ा मैं

मोहम्मद रफ़ी सौदा

दामन सबा न छू सके जिस शह-सवार का

मोहम्मद रफ़ी सौदा

चेहरे पे न ये नक़ाब देखा

मोहम्मद रफ़ी सौदा

आराम फिर कहाँ है जो हो दिल में जा-ए-हिर्स

मोहम्मद रफ़ी सौदा

आदम का जिस्म जब कि अनासिर से मिल बना

मोहम्मद रफ़ी सौदा

हैरत से तकता है सहरा बारिश के नज़राने को

सऊद उस्मानी

हर रोज़ इम्तिहाँ से गुज़ारा तो मैं गया

सऊद उस्मानी

हैरत से तकता है सहरा बारिश के नज़राने को

सऊद उस्मानी

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