हाथ Poetry (page 74)

शीशा का आदमी

अख़्तर-उल-ईमान

सब्ज़ा-ए-बेगाना

अख़्तर-उल-ईमान

एक लड़का

अख़्तर-उल-ईमान

डासना स्टेशन का मुसाफ़िर

अख़्तर-उल-ईमान

बाज़-आमद --- एक मुन्ताज

अख़्तर-उल-ईमान

ज़रा सी देर थी बस इक दिया जलाना था

अख्तर शुमार

उठते नहीं हैं अब तो दुआ के लिए भी हाथ

अख़्तर शीरानी

अँगूठी

अख़्तर शीरानी

मिरी आँखों से ज़ाहिर ख़ूँ-फ़िशानी अब भी होती है

अख़्तर शीरानी

किस की आँखों का लिए दिल पे असर जाते हैं

अख़्तर शीरानी

हमारे हाथ में कब साग़र-ए-शराब नहीं

अख़्तर शीरानी

यारान-ए-तेज़-गाम से रंजिश कहाँ है अब

अख़तर शाहजहाँपुरी

हाथ जब मौसम के गीले हो गए हैं

अख़तर शाहजहाँपुरी

ये हम से पूछते हो रंज-ए-इम्तिहाँ क्या है

अख़्तर सईद ख़ान

तुम हो या छेड़ती है याद-ए-सहर कोई तो है

अख़्तर सईद ख़ान

दिल की राहें ढूँडने जब हम चले

अख़्तर सईद ख़ान

पहले तराशा काँच से उस ने मिरा वजूद

अख़्तर रज़ा सलीमी

तुम्हारे होने का शायद सुराग़ पाने लगे

अख़्तर रज़ा सलीमी

हमारे जिस्म अगर रौशनी में ढल जाएँ

अख़्तर रज़ा सलीमी

शनासाई

अख़्तर पयामी

लम्स-ए-आख़िरी

अख़्तर पयामी

कब लोगों ने अल्फ़ाज़ के पत्थर नहीं फेंके

अख़्तर नज़्मी

मिरे दिल पे हाथ रख कर मुझे देने वाले तस्कीं

अख़तर मुस्लिमी

जो संग हो के मुलाएम है सादगी की तरह

अख़तर इमाम रिज़वी

चाँदनी के हाथ भी जब हो गए शल रात को

अख़तर इमाम रिज़वी

सुख़न दरमाँदा है

अख़्तर हुसैन जाफ़री

थी तितलियों के तआ'क़ुब में ज़िंदगी मेरी

अख़्तर होशियारपुरी

रुख़्सत-ए-रक़्स भी है पाँव में ज़ंजीर भी है

अख़्तर होशियारपुरी

क़र्या-ए-जाँ से गुज़र कर हम ने ये देखा भी है

अख़्तर होशियारपुरी

ख़्वाब-महल में कौन सर-ए-शाम आ कर पत्थर मारता है

अख़्तर होशियारपुरी

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