हाथ Poetry (page 75)

जो मुझ को देख के कल रात रो पड़ा था बहुत

अख़्तर होशियारपुरी

दर्द की दौलत-ए-नायाब को रुस्वा न करो

अख़्तर होशियारपुरी

बारहा ठिठका हूँ ख़ुद भी अपना साया देख कर

अख़्तर होशियारपुरी

मैं परेशाँ हूँ मिलें चंद निवाले कैसे

अख़लाक़ बन्दवी

चर्ख़ भी छू लें तो जाना है इसी मिट्टी में

अख़लाक़ बन्दवी

अश्क आँखों में भरे बैठे हो

अख़लाक़ बन्दवी

तिरी आश्नाई से तेरी रज़ा तक

अख़लाक़ अहमद आहन

न धूप धूप रहे और न साया साया तो

अखिलेश तिवारी

उस ख़ुश-अदा के आइना-ख़ाने में जाऊँगा

अकबर मासूम

छोड़ के माल-ओ-दौलत सारी दुनिया में अपनी

अकबर हैदराबादी

सायों से भी डर जाते हैं कैसे कैसे लोग

अकबर हैदराबादी

मुझे लिक्खो वहाँ क्या हो रहा है

अकबर हमीदी

पब्लिक में ज़रा हाथ मिला लीजिए मुझ से

अकबर इलाहाबादी

मेरे हवास-ए-इश्क़ में क्या कम हैं मुंतशिर

अकबर इलाहाबादी

मअ'नी को भुला देती है सूरत है तो ये है

अकबर इलाहाबादी

इक बोसा दीजिए मिरा ईमान लीजिए

अकबर इलाहाबादी

हर-सू जहाँ में शाम ओ सहर ढूँडते हैं हम

आजिज़ मातवी

दर्द-ए-मुसलसल से आहों में पैदा वो तासीर हुई

आजिज़ मातवी

ये किस लिए है तू इतना उदास दरवाज़े

अजीत सिंह हसरत

जब मेरा घर बहिश्त सी गुल-वादियों में था

अजीत सिंह हसरत

घोंसले राख हो गए जल के

अजीत सिंह हसरत

शाम आई है लिए हाथ में यादों के चराग़

अजय सहाब

किसी को हम से हैं चंद शिकवे किसी को बेहद शिकायतें हैं

ऐतबार साजिद

पाँव फँसे में हाथ छुड़ाने आया था

ऐनुद्दीन आज़िम

रात अभी आधी गुज़री है

ऐन ताबिश

पुरानी फ़ाइलों में गुनगुनाती शाम

ऐन ताबिश

बदलने का कोई मौसम नहीं होता

ऐन ताबिश

शब-रंग परिंदे रग-ओ-रेशे में उतर जाएँ

अहसन यूसुफ़ ज़ई

इल्म की ज़रूरत

अहमक़ फफूँदवी

काएनात-ए-ज़ात का मुसाफ़िर

अहमद ज़फ़र

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