हुआ Poetry (page 12)

अच्छा हुआ कि दम शब-ए-हिज्राँ निकल गया

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

गिला नहीं कि किनारों ने साथ छोड़ दिया

ज़ेब बरैलवी

रखी न गई दिल में कोई बात छुपा कर

ज़हरा क़रार

घटने वाले थे जब अज़ाब मिरे

ज़हरा क़रार

घटने वाले थे जब अज़ाब मरे

ज़हरा क़रार

आप को क्यूँ नहीं लगा पत्थर

ज़हरा क़रार

किसी की याद-ए-रंगीं में है ये दिल बे-क़रार अब तक

ज़हीर अहमद ताज

आसूदा-ए-महफ़िल अभी दम भर न हुआ था

ज़हीर अहमद ताज

इल्ज़ाम बता कौन मिरे सर नहीं आया

ज़ाहिदुल हक़

हम ने तो शराफ़त में हर चीज़ गँवा दी है

ज़ाहिदुल हक़

मौत

ज़ाहिदा ज़ैदी

हिकायत-ए-गुरेज़ाँ

ज़ाहिदा ज़ैदी

सिवा है हद से अब एहसास की गिरानी भी

ज़ाहिदा ज़ैदी

हो गए अम्बर-फ़शाँ दोनों-जहाँ मेरे लिए

ज़ाहीदा कमाल

मैं किनारों को रुलाने लगा हूँ

ज़ाहिद शम्सी

किसी मंज़र के पस-मंज़र में जा कर

ज़ाहिद शम्सी

ख़्वाब सितारे होते होंगे लेकिन आँखें रेत

ज़ाहिद शम्सी

मिरे लोगो! मैं ख़ाली हाथ आया हूँ

ज़ाहिद मसूद

कल रात बहुत ज़ोर था साहिल की हवा में

ज़ाहिद मसूद

मिज़ाज-ए-शे'र को हर दौर में रहा महबूब

ज़ाहिद कमाल

तुम जा चुकी हो

ज़ाहिद इमरोज़

तज़ाद की काश्त

ज़ाहिद इमरोज़

मेरा कोई दोस्त नहीं

ज़ाहिद इमरोज़

काएनाती गर्द में बरसात की एक शाम

ज़ाहिद इमरोज़

चोर दरवाज़ा खुला रहता है

ज़ाहिद इमरोज़

क़सम उस बदन की

ज़ाहिद हसन

सितारे चुप हैं कि नग़्मा-सरा समुंदर है

ज़ाहिद फ़ारानी

कई दिलों में पड़ी इस से शोर-ओ-शर की तरह

ज़ाहिद फ़ारानी

जहान-ए-तंग में तन्हा हुआ मैं

ज़ाहिद फ़ारानी

है मेरे सर से कोई बोझ उतारने वाला

ज़ाहिद फ़ारानी

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