कौशल Poetry (page 17)

अहसन तक़्वीम

बेबाक भोजपुरी

फ़स्ल-ए-बहार जाने ये क्या गुल कतर गई

बेबाक भोजपुरी

दिल लगा लेते हैं अहल-ए-दिल वतन कोई भी हो

बासिर सुल्तान काज़मी

हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है

बशीर बद्र

ग़ज़लों का हुनर अपनी आँखों को सिखाएँगे

बशीर बद्र

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा

बशीर बद्र

ग़ज़लों का हुनर अपनी आँखों को सिखाएँगे

बशीर बद्र

हर गाम पे आवारगी-ओ-दर-ब-दरी में

बशीर अहमद बशीर

हमारे ऐब ने बे-ऐब कर दिया हम को

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

मिसाल-ए-तार-ए-नज़र क्या नज़र नहीं आता

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

सुबुक-सरी में भी अंदेशा-ए-हवा रखना

बाक़र नक़वी

जाने क्या सोच के घर तक पहुँचा

बक़ा बलूच

दिल का मोआ'मला वही महशर वही रहा

बलराज कोमल

बअ'द मुद्दत ये जिला किस के हुनर ने बख़्शी

बकुल देव

हमें देखा न कर उड़ती नज़र से

बकुल देव

हादसात अब के सफ़र में नए ढब से आए

बकुल देव

चाल अपनी अदा से चलते हैं

बकुल देव

हुसूल-ए-मंज़िल-ए-जाँ का हुनर नहीं आया

बख़्श लाइलपूरी

हुसूल-ए-मंज़िल-ए-जाँ का हुनर नहीं आया

बख़्श लाइलपूरी

न थी हाल की जब हमें अपने ख़बर रहे देखते औरों के ऐब ओ हुनर

ज़फ़र

नहीं इश्क़ में इस का तो रंज हमें कि क़रार ओ शकेब ज़रा न रहा

ज़फ़र

काफ़िर तुझे अल्लाह ने सूरत तो परी दी

ज़फ़र

फ़िक्र-ए-अहल-ए-हुनर पे बैठी है

बद्र वास्ती

मसअले ज़ेर-ए-नज़र कितने थे

अज़रा वहीद

ग़रीब शहर

अज़ीज़ क़ैसी

दश्त-ओ-सहरा में समुंदर में सफ़र है मेरा

अज़ीज़ नबील

ऐ शहर-ए-ख़िरद की ताज़ा हवा वहशत का कोई इनआम चले

अज़ीज़ हामिद मदनी

कुछ ज़िंदगी में इश्क़-ओ-वफ़ा का हुनर भी रख

अज़ीज़ अन्सारी

रह गया दीदा-ए-पुर-आब का सामाँ हो कर

अज़हर नक़वी

नज़र की ज़द में सर कोई नहीं है

अज़हर इनायती

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