जिगर Poetry (page 20)

ऐ जान शब-ए-हिज्राँ तिरी सख़्त बड़ी है

फ़ाएज़ देहलवी

हम ने मयख़ाने की तक़्दीस बचा ली होती

एज़ाज़ अफ़ज़ल

जग में आता है हर बशर तन्हा

एलिज़ाबेथ कुरियन मोना

डूबने वाले को तिनके का सहारा है बहुत

एलिज़ाबेथ कुरियन मोना

तंहाई

एजाज़ फ़ारूक़ी

जब कभी दर्द की तस्वीर बनाने निकले

अहया भोजपुरी

ख़याल के फूल खिल रहे हैं बहार के गीत गा रहा हूँ

एहसान दरबंगावी

नज़र फ़रेब-ए-क़ज़ा खा गई तो क्या होगा

एहसान दानिश

जबीं की धूल जिगर की जलन छुपाएगा

एहसान दानिश

चाँद भी सितारों को साथ ले के चलता है

दिलकश सागरी

जादा-ए-फ़न में बड़े सख़्त मक़ाम आते हैं

दिलावर फ़िगार

आतिश-ए-इश्क़ सूँ जो जलता है

दाऊद औरंगाबादी

राहत कहाँ नसीब थी जो अब कहीं नहीं

दत्तात्रिया कैफ़ी

मिरी आह का तुम असर देख लेना

दाग़ देहलवी

ये बात बात में क्या नाज़ुकी निकलती है

दाग़ देहलवी

शब-ए-वस्ल भी लब पे आए गए हैं

दाग़ देहलवी

सब लोग जिधर वो हैं उधर देख रहे हैं

दाग़ देहलवी

खुलता नहीं है राज़ हमारे बयान से

दाग़ देहलवी

इस क़दर नाज़ है क्यूँ आप को यकताई का

दाग़ देहलवी

होश आते ही हसीनों को क़यामत आई

दाग़ देहलवी

हाथ निकले अपने दोनों काम के

दाग़ देहलवी

दिल चुरा कर नज़र चुराई है

दाग़ देहलवी

भला हो पीर-ए-मुग़ाँ का इधर निगाह मिले

दाग़ देहलवी

अच्छी सूरत पे ग़ज़ब टूट के आना दिल का

दाग़ देहलवी

या-रब ग़म-ए-हिज्राँ में इतना तो किया होता

चराग़ हसन हसरत

या-रब ग़म-ए-हिज्राँ में इतना तो किया होता

चराग़ हसन हसरत

बे-ख़ुदी में है न वो पी कर सँभल जाने में है

चरख़ चिन्योटी

मर्सिया गोपाल कृष्ण गोखले

चकबस्त ब्रिज नारायण

कभी था नाज़ ज़माने को अपने हिन्द पे भी

चकबस्त ब्रिज नारायण

ज़ौ-बार इसी सम्त हुए शम्स-ओ-क़मर भी

ब्रहमा नन्द जलीस

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