शरीर Poetry (page 37)

23-मार्च अज़ान-ए-सुब्ह-ए-नियाज़

अशरफ़ जावेद

ख़ून आँखों से निकलता ही रहा

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

शहर-बदर

असग़र नदीम सय्यद

जब हम दोनों जुदा हुए थे

असग़र नदीम सय्यद

आज तुम ऐसे हँसे

असग़र नदीम सय्यद

आदमी पहले भी नंगा था मगर जिस्म तलक

असग़र मेहदी होश

प्यासा रहा मैं बाला-क़दी के फ़रेब में

असग़र मेहदी होश

हमेशा तंग रहा मुझ पे ज़िंदगी का लिबास

असग़र मेहदी होश

ज़ौक़-ए-सरमस्ती को महव-ए-रू-ए-जानाँ कर दिया

असग़र गोंडवी

जाने लगे हैं अब दम-ए-सर्द आसमाँ तलक

असीर लखनवी

आते हैं बर्ग-ओ-बार दरख़्तों के जिस्म पर

असअ'द बदायुनी

ये जो शाम ज़र-निगार है

असअ'द बदायुनी

ये लोग ख़्वाब बहुत कर्बला के देखते हैं

असअ'द बदायुनी

वो एक नाम जो दरिया भी है किनारा भी

असअ'द बदायुनी

कहते हैं लोग शहर तो ये भी ख़ुदा का है

असअ'द बदायुनी

हवा हवस के इलाक़े दिखा रही है मुझे

असअ'द बदायुनी

फ़ज़ाएँ कैफ़-ए-बहाराँ से जब महकती हैं

अरशद सिद्दीक़ी

पलट कर देखने का मुझ में यारा ही नहीं था

अरशद जमाल 'सारिम'

खुलने से एक जिस्म के सौ ऐब ढक गए

अरशद अली ख़ान क़लक़

गर दिल में कर के सैर-ए-दिल-ए-दाग़-दार देख

अरशद अली ख़ान क़लक़

बैठा हूँ वक़्फ़-ए-मातम-ए-हस्ती मिटा हुआ

अर्श सिद्दीक़ी

न हर्फ़-ए-शौक़ न तर्ज़-ए-बयाँ से आती है

अरमान नज्मी

अंधे अदम वजूद के गिर्दाब से निकल

आरिफ़ शफ़ीक़

हयूले

आरिफ़ अब्दुल मतीन

मताअ-ओ-माल न दे दौलत-ए-तबाही दे

अक़ील शादाब

लिबास गर्द का और जिस्म नूर का निकला

अक़ील शादाब

बराए-नाम सही कोई मेहरबान तो है

अक़ील शादाब

मेरी नज़र के लिए कोई रिवायत न थी

अनवर सिद्दीक़ी

हवस बला की मोहब्बत हमें बला की है

अनवर शऊर

ब'अद-अज़-मर्ग

अनवर सेन रॉय

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