भगवान Poetry (page 7)

अपने अंदाज़ में औरों से जुदा लगते हो

वजीह सानी

दुनिया अपनी मंज़िल पहुँची तुम घर में बेज़ार पड़े

वजद चुगताई

बढ़ चली है बहुत हया तेरी

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

यही है इश्क़ की मुश्किल तो मुश्किल आसाँ है

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

'वहशत'-ए-मुब्तला ख़ुदा के लिए

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

बहार आई है आराइश-ए-चमन के लिए

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

का'बा-ओ-दैर-ओ-कलीसा का तजस्सुस क्यूँ हो

वाहिद प्रेमी

फ़रेब-ए-राह-ए-मोहब्बत का आसरा भी नहीं

वहीदुल हसन हाश्मी

हर एक गाम पे सज्दा यहाँ रवा होगा

वहीदा नसीम

ग़म के हाथों शुक्र-ए-ख़ुदा है इश्क़ का चर्चा आम नहीं

वहीद क़ुरैशी

लेते हैं तिरा नाम ही यूँ जागते सोते

वहीद अख़्तर

परोमीथियस

वहीद अख़्तर

आगही की दुआ

वहीद अख़्तर

तू ग़ज़ल बन के उतर बात मुकम्मल हो जाए

वहीद अख़्तर

लिपटी हुई फिरती है नसीम उन की क़बा से

वहीद अख़्तर

जिस को माना था ख़ुदा ख़ाक का पैकर निकला

वहीद अख़्तर

दीवानों को मंज़िल का पता याद नहीं है

वहीद अख़्तर

आँख जो नम हो वही दीदा-ए-तर मेरा है

वहीद अख़्तर

क़ुर्ब-ए-मंज़िल टूट जाए हौसला अच्छा नहीं

वफ़ा सिद्दीक़ी

मैं इंसाँ था ख़ुदा होने से पहले

विशाल खुल्लर

जल्द आएँ जिन्हें सीने से लगाना है मुझे

विपुल कुमार

इक-दूजे में भी तो रहा जा सकता है

विनीत आश्ना

वो निहत्ता नहीं अकेला है

विकास शर्मा राज़

क़ाफ़िले से अलग चले हम लोग

विकास शर्मा राज़

मिरी वफ़ा की मुकम्मल तू दास्ताँ कर दे

विजय शर्मा अर्श

महताब फ़ज़ा के आइने में

वसाफ़ बासित

लाख नादाँ हैं मगर इतनी सज़ा भी न मिले

वारिस किरमानी

बना कर ख़ुद को जिस ने इक भला इंसान रक्खा है

वली मदनी

नई सहर है ये लोगो नया सवेरा है

वफ़ा मलिकपुरी

मुमकिन नहीं है अपने को रुस्वा वफ़ा करे

वफ़ा बराही

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