खुशी Poetry (page 19)

और साक़ी पिला अभी क्या है

बेख़ुद देहलवी

आशिक़ समझ रहे हैं मुझे दिल लगी से आप

बेख़ुद देहलवी

नए ज़माने में अब ये कमाल होने लगा

बेकल उत्साही

मसरूर भी हूँ ख़ुश भी हूँ लेकिन ख़ुशी नहीं

बहज़ाद लखनवी

रहने दे रतजगों में परेशाँ मज़ीद उसे

बेदिल हैदरी

सरीर-ए-ख़ामा से तशरीह-ए-सिर्र-ए-ज़ी होगी

बेबाक भोजपुरी

मेरे रोने पर किसी की चश्म गिर्यां हाए हाए

बासित भोपाली

किसी के नक़्श-ए-क़दम का निशाँ नहीं मिलता

बासित भोपाली

इक लम्हा भी गुज़ारूँ भला क्यूँ किसी के साथ

बशीर महताब

मिरी ज़िंदगी भी मिरी नहीं ये हज़ार ख़ानों में बट गई

बशीर बद्र

किसी की याद में पलकें ज़रा भिगो लेते

बशीर बद्र

चाय की प्याली में नीली टेबलेट घोली

बशीर बद्र

क्या क्या लोग ख़ुशी से अपनी बिकने पर तय्यार हुए

बशर नवाज़

ब-हर-उनवाँ मोहब्बत को बहार-ए-ज़िंदगी कहिए

बशर नवाज़

यूँ सितमगर नहीं होते जानाँ

बाक़ी अहमदपुरी

एक पुर-असरार सदा

बलराज कोमल

जो है चश्मा उसे सराब करो

बकुल देव

आग ही काश लग गई होती

बदीउज़्ज़माँ ख़ावर

वही जिंस-ए-वफ़ा आख़िर फ़राहम होती जाती है

बीएस जैन जौहर

एक नज़्म रोज़ आती है

अज़रा अब्बास

ये हम पर लुत्फ़ कैसा ये करम क्या

अज़ीज़ वारसी

पाते हैं कुछ कमी सी तस्वीर-ए-ज़िंदगी में

अज़ीज़ तमन्नाई

कुछ ज़िंदगी में इश्क़-ओ-वफ़ा का हुनर भी रख

अज़ीज़ अन्सारी

ख़ामोश ज़बाँ से जब तक़रीर निकलती है

अज़हर हाश्मी

गुज़रे हुए लम्हात को अब ढूँड रहा हूँ

अज़हर हाश्मी

क़दम क़दम निशान ढूँढता रहा

अज़हर अब्बास

एक वो हैं कि जिन्हें अपनी ख़ुशी ले डूबी

आज़ाद गुलाटी

गो मिरा साथ मिरी अपनी नज़र ने न दिया

आज़ाद गुलाटी

सोचों में लहू उछालते हैं

अय्यूब ख़ावर

लहरों में बदन उछालते हैं

अय्यूब ख़ावर

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