होंठ Poetry (page 42)

अक्स भी कब शब-ए-हिज्राँ का तमाशाई है

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

ऐ तजल्ली क्या हुआ शेवा तिरी तकरार का

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

यहीं कहीं कोई आवाज़ दे रहा था मुझे

अशफ़ाक़ हुसैन

हो गई अपनों की ज़ाहिर दुश्मनी अच्छा हुआ

असग़र वेलोरी

आए थे घर में आग लगाने शरीर लोग

असग़र मेहदी होश

यूँ मुस्कुराए जान सी कलियों में पड़ गई

असग़र गोंडवी

सामने उन के तड़प कर इस तरह फ़रियाद की

असग़र गोंडवी

ख़ुदा जाने कहाँ है 'असग़र'-ए-दीवाना बरसों से

असग़र गोंडवी

आलाम-ए-रोज़गार को आसाँ बना दिया

असग़र गोंडवी

किस तरह आए तिरी बज़्म-ए-तरब में आइना

असीर लखनवी

न शरह-ए-शौक़ न तस्कीन जान-ए-ज़ार में है

असर लखनवी

बड़े नादान थे हम रेत को आब-ए-रवाँ समझे

असअ'द बदायुनी

कुछ तो मिल जाए लब-ए-शीरीं से

आरज़ू लखनवी

होश-ओ-बे-होशी की मंज़िल एक है रस्ते जुदा

आरज़ू लखनवी

वो सर-ए-बाम कब नहीं आता

आरज़ू लखनवी

लाग़र ऐसा वहशत-ए-इश्क़-ए-लब-ए-शीरीं में हूँ

अरशद अली ख़ान क़लक़

जब हुआ गर्म-ए-कलाम-ए-मुख़्तसर महका दिया

अरशद अली ख़ान क़लक़

यार के नर्गिस-ए-बीमार का बीमार रहा

अरशद अली ख़ान क़लक़

यगाना उन का बेगाना है बेगाना यगाना है

अरशद अली ख़ान क़लक़

था क़स्द-ए-क़त्ल-ए-ग़ैर मगर मैं तलब हुआ

अरशद अली ख़ान क़लक़

तासीर जज़्ब मस्तों की हर हर ग़ज़ल में है

अरशद अली ख़ान क़लक़

पिन्हाँ था ख़ुश-निगाहों की दीदार का मरज़

अरशद अली ख़ान क़लक़

परतव पड़ा जो आरिज़-ए-गुलगून-ए-यार का

अरशद अली ख़ान क़लक़

लूटे मज़े जो हम ने तुम्हारे उगाल के

अरशद अली ख़ान क़लक़

जुनूँ बरसाए पत्थर आसमाँ ने मज़रा-ए-जाँ पर

अरशद अली ख़ान क़लक़

हम ने एहसान असीरी का न बर्बाद किया

अरशद अली ख़ान क़लक़

हम तो हों दिल से दूर रहें पास और लोग

अरशद अली ख़ान क़लक़

हैं तेग़-ए-नाज़-ए-यार के बिस्मिल अलग अलग

अरशद अली ख़ान क़लक़

गुलों पर साफ़ धोका हो गया रंगीं कटोरी का

अरशद अली ख़ान क़लक़

आएँगे वो तो आप में हरगिज़ न आएँगे

अरशद अली ख़ान क़लक़

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