लोग Poetry (page 41)

बीमार हो गया हूँ शिफा-ख़ाना चाहिए

फ़रहत एहसास

तुम्हारे ख़्वाब मिरे साथ साथ चलते हैं

फ़रहत अब्बास शाह

तल्ख़ गुज़रे कि शादमाँ गुज़रे

फ़रीद जावेद

तल्ख़ गुज़रे कि शादमाँ गुज़रे

फ़रीद जावेद

तल्ख़ गुज़रे कि शादमाँ गुज़रे

फ़रीद जावेद

किस उजाले का निशाँ हैं हम लोग

फ़रीद जावेद

कमी ज़रा सी अगर फ़ासले में आ जाए

फ़राग़ रोहवी

जिस दिन से कोई ख़्वाहिश-ए-दुनिया नहीं रखता

फ़राग़ रोहवी

दिन में भी हसरत-ए-महताब लिए फिरते हैं

फ़राग़ रोहवी

फटी मश्कें लिए दिन-रात दरिया देखने वाले

फ़क़ीह हैदर

जिस्म में गूँजता है रूह पे लिक्खा दुख है

फ़क़ीह हैदर

माया-ए-नाज़-ए-राज़ हैं हम लोग

फ़ानी बदायुनी

यूँ इंतिक़ाम तुझ से फ़स्ल-ए-बहार लेंगे

फ़ना निज़ामी कानपुरी

मुझे प्यार से तिरा देखना मुझे छुप छुपा के वो देखना

फ़ना निज़ामी कानपुरी

हम आगही-ए-इश्क़ का अफ़्साना कहेंगे

फ़ना निज़ामी कानपुरी

किस को सुनाऊँ हाल-ए-ग़म कोई ग़म-आश्ना नहीं

फ़ना बुलंदशहरी

ऐ हम-सफ़रो क्यूँ न यहीं शहर बसा लें

फख्र ज़मान

वो पहले अंधे कुएँ में गिराए जाते हैं

फख्र ज़मान

कुछ बात नहीं जिस्म अगर मेरा जला है

फख्र ज़मान

जाएँगे कहाँ सर पे जब आ जाएगा सूरज

फख्र ज़मान

जब बुलंदी पर पहुँच जाते हैं लोग

फ़ैज़ी निज़ाम पुरी

कोई नाम है न कोई निशाँ मुझे क्या हुआ

फ़ैज़ी

जानता हूँ कि कई लोग हैं बेहतर मुझ से

फ़ैज़ी

वो जितने दूर हैं उतने ही मेरे पास भी हैं

फ़ैज़ुल हसन

सुब्ह-ए-नौ लाती है हर शाम तुम्हें क्या मा'लूम

फ़ैज़ुल हसन

सब क़त्ल हो के तेरे मुक़ाबिल से आए हैं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

शीशों का मसीहा कोई नहीं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ये किस ख़लिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

सब क़त्ल हो के तेरे मुक़ाबिल से आए हैं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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