लोग Poetry (page 42)

कुछ पहले इन आँखों आगे क्या क्या न नज़ारा गुज़रे था

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

कहा फ़लक ने ये उड़ते हुए परिंदों से

फ़ैसल सईद फ़ैसल

ये तीरा-बख़्त बयानों में क़ैद रहते हैं

फ़ैसल सईद फ़ैसल

क्या इल्म कि रोते हों तो मर जाते हों 'फ़ैसल'

फ़ैसल अजमी

इन लोगों में रहने से हम बेघर अच्छे थे

फ़ैसल अजमी

गिर जाए जो दीवार तो मातम नहीं करते

फ़ैसल अजमी

नज़्र-ए-फ़िराक़

फ़हमीदा रियाज़

भगत-सिंह के नाम

फ़हीम शनास काज़मी

रुस्वा भी हुए जाम पटकना भी न आया

एज़ाज़ अफ़ज़ल

ख़्वाबों के सनम-ख़ाने जब ढाए गए होंगे

एज़ाज़ अफ़ज़ल

दामन तेरा मुझ से छूटा मिलने के हालात नहीं

एलिज़ाबेथ कुरियन मोना

दरबानों तक के चेहरे रऊनत से मस्ख़ हैं

एजाज़ वारसी

ज़ालिम से मुस्तफ़ा का अमल चाहते हैं लोग

एजाज़ रहमानी

कितने बा-होश हो गए हम लोग

एजाज़ रहमानी

नए सफ़र में जो पिछले सफ़र के साथी थे

एजाज़ उबैद

पेचाक-ए-उम्र अपने सँवार आइने के साथ

एजाज़ गुल

कतबा

एजाज़ फ़ारूक़ी

चुप

एजाज़ फ़ारूक़ी

क़ब्रों में नहीं हम को किताबों में उतारो

एजाज तवक्कल

बहती हुई आँखों की रवानी में मरे हैं

एजाज तवक्कल

मुहाजिर

एजाज़ अहमद एजाज़

बीमारी की ख़बर

एहतिशाम हुसैन

गुलशन-ए-दिल में मिले अक़्ल के सहरा में मिले

एहतिशाम हुसैन

कुछ लोग जो सवार हैं काग़ज़ की नाव पर

एहसान दानिश

नज़र फ़रेब-ए-क़ज़ा खा गई तो क्या होगा

एहसान दानिश

कुछ लोग जो सवार हैं काग़ज़ की नाव पर

एहसान दानिश

जीने के लिए जो मर रहे हैं

एहसान दानिश

अपनी रुस्वाई का एहसास तो अब कुछ भी नहीं

एहसान दानिश

हर शख़्स में कुछ लोग कमी ढूँड रहे हैं

डॉक्टर आज़म

इस से पहले कि लोग पहचानें

दिवाकर राही

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