लोग Poetry (page 44)

कोई सिवा-ए-बदन है न है वरा-ए-बदन

दानियाल तरीर

ख़्वाब जज़ीरा बन सकते थे नहीं बने

दानियाल तरीर

ख़ामोशी की क़िर्अत करने वाले लोग

दानियाल तरीर

कुछ अपने दौर की भी कहानी लिखा करो

दानिश फ़राही

सब लोग जिधर वो हैं उधर देख रहे हैं

दाग़ देहलवी

हज़ारों काम मोहब्बत में हैं मज़े के 'दाग़'

दाग़ देहलवी

उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं

दाग़ देहलवी

सब लोग जिधर वो हैं उधर देख रहे हैं

दाग़ देहलवी

कौन सा ताइर-ए-गुम-गश्ता उसे याद आया

दाग़ देहलवी

अभी हमारी मोहब्बत किसी को क्या मालूम

दाग़ देहलवी

इंसान नहीं वो जो गुनहगार नहीं हैं

डी. राज कँवल

दुनिया पत्थर फेंक रही है झुँझला कर फ़र्ज़ानों पर

डी. राज कँवल

काएनात-ए-आरज़ू में हम बसर करने लगे

चित्रांश खरे

क़रार खो के चले बे-क़रार हो के चले

चरख़ चिन्योटी

क़रार खो के चले बे-क़रार हो के चले

चरख़ चिन्योटी

जब सर-ए-बाम वो ख़ुर्शीद-जमाल आता है

चरख़ चिन्योटी

हम जो मिल बैठें तो यक-जान भी हो सकते हैं

चरख़ चिन्योटी

हम जो मिल बैठें तो यक जान भी हो सकते हैं

चरख़ चिन्योटी

बज़्म-ए-जानाँ में मोहब्बत का असर देखेंगे

चरख़ चिन्योटी

बज़्म-ए-जानाँ में मोहब्बत का असर देखेंगे

चरख़ चिन्योटी

कैसा वो मौसम था ये तो समझ न पाए हम

चंद्र प्रकाश शाद

जले चराग़ बुझाने की ज़िद नहीं करते

चाँदनी पांडे

ये कैसी आग अभी ऐ शम्अ तेरे दिल में बाक़ी है

बिस्मिल इलाहाबादी

आप अपने रक़ीब हैं हम लोग

बिर्ज लाल रअना

हम से भली चाल चली चाँदनी

बिमल कृष्ण अश्क

कब एक रंग में दुनिया का हाल ठहरा है

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

जाने कितने लोग शामिल थे मिरी तख़्लीक़ में

भारत भूषण पन्त

लाख टकराते फिरें हम सर दर-ओ-दीवार से

भारत भूषण पन्त

दीद की तमन्ना में आँख भर के रोए थे

भारत भूषण पन्त

आज खेलेंगे मिरे ख़ून से होली सब लोग

बेताब सूरी

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