दृश्य Poetry (page 39)

शिकारी रात भर बैठे रहे ऊँची मचानों पर

अख़्तर होशियारपुरी

शाम तन्हाई धुआँ उठता बराबर देखते

अख़्तर होशियारपुरी

रुख़्सत-ए-रक़्स भी है पाँव में ज़ंजीर भी है

अख़्तर होशियारपुरी

मंज़िलों के फ़ासले दीवार-ओ-दर में रह गए

अख़्तर होशियारपुरी

ख़्वाहिशें इतनी बढ़ीं इंसान आधा रह गया

अख़्तर होशियारपुरी

ख़्वाब-महल में कौन सर-ए-शाम आ कर पत्थर मारता है

अख़्तर होशियारपुरी

बजा कि दुश्मन-ए-जाँ शहर-ए-जाँ के बाहर है

अख़्तर होशियारपुरी

हर वक़्त नौहा-ख़्वाँ सी रहती हैं मेरी आँखें

अख़्तर अंसारी

किसे जाना कहाँ है मुनहसिर होता है इस पर भी

अखिलेश तिवारी

हँसना रोना पाना खोना मरना जीना पानी पर

अखिलेश तिवारी

जुनून-ए-इश्क़ का जो कुछ हुआ अंजाम क्या कहिए

अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी

दश्त-ए-अदम का सन्नाटा

अकबर हैदराबादी

सितम-ज़दा कई बशर क़दम क़दम पे थे

अकबर हैदराबादी

निगह-ए-शौक़ से हुस्न-ए-गुल-ओ-गुलज़ार तो देख

अकबर हैदराबादी

जब सुब्ह की दहलीज़ पे बाज़ार लगेगा

अकबर हैदराबादी

कहाँ वो अब लुत्फ़-ए-बाहमी है मोहब्बतों में बहुत कमी है

अकबर इलाहाबादी

इतना करम इतनी अता फिर हो न हो

अजमल सिद्दीक़ी

वक़्त-ए-सफ़र क़रीब है बिस्तर समेट लूँ

अजमल अजमली

दो पल के हैं ये सब मह ओ अख़्तर न भूलना

अजमल अजमली

ज़माने हो गए तेरे करम की आस लगी

अजीत सिंह हसरत

मुझ को प्रेम कहानी कर दो

अजीत सिंह हसरत

ख़ाक में मिलना था आख़िर बे-निशाँ होना ही था

अजीत सिंह हसरत

इस चमन का अजीब माली है

अजीत सिंह हसरत

ये जो फूलों से भरा शहर हुआ करता था

ऐतबार साजिद

जिस को हम ने चाहा था वो कहीं नहीं इस मंज़र में

ऐतबार साजिद

फिर वही लम्बी दो-पहरें हैं फिर वही दिल की हालत है

ऐतबार साजिद

भीड़ है बर-सर-ए-बाज़ार कहीं और चलें

ऐतबार साजिद

जो मैं ने कह दिया उस से मुकरने वाला नहीं

ऐनुद्दीन आज़िम

रात अभी आधी गुज़री है

ऐन ताबिश

बदलने का कोई मौसम नहीं होता

ऐन ताबिश

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