गंतव्य Poetry (page 19)

नहीं है आशियाँ लेकिन है ख़ाक-ए-आशियाँ बाक़ी

साजिद सिद्दीक़ी लखनवी

जो महव-ए-हालात नहीं है

साजिद सिद्दीक़ी लखनवी

हिजाबात उठ रहे हैं दरमियाँ से

साजिद सिद्दीक़ी लखनवी

तारे सारे रक़्स करेंगे चाँद ज़मीं पर उतरेगा

साजिद हाश्मी

तू ने पूछा है मिरे दोस्त!

साइमा असमा

कोई इम्काँ तो न था उस का मगर चाहता था

साइमा असमा

उस मुसाफ़िर की नक़ाहत का ठिकाना क्या है

सैफ़ुद्दीन सैफ़

सुब्ह से शाम के आसार नज़र आने लगे

सैफ़ुद्दीन सैफ़

क़ज़ा का वक़्त रुख़्सत की घड़ी है

सैफ़ुद्दीन सैफ़

लुत्फ़ फ़रमा सको तो आ जाओ

सैफ़ुद्दीन सैफ़

क्या मंज़िल-ए-ग़म सिमट गई है

सैफ़ुद्दीन सैफ़

चैन अब मुझ को तह-ए-दाम तो लेने देते

सैफ़ुद्दीन सैफ़

बड़े ख़तरे में है हुस्न-ए-गुलिस्ताँ हम न कहते थे

सैफ़ुद्दीन सैफ़

कर के मसहूर मुझे चश्म-ए-करम से पहले

सैफ़ बिजनोरी

मेरी मंज़िल भी आसमान में है

साहिर शेवी

यकसूई

साहिर लुधियानवी

मैं ने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी

साहिर लुधियानवी

लहु नज़्र दे रही है हयात

साहिर लुधियानवी

हर-चंद मिरी क़ुव्वत-ए-गुफ़्तार है महबूस

साहिर लुधियानवी

हर-चंद मिरी क़ुव्वत-ए-गुफ़्तार है महबूस

साहिर लुधियानवी

हर क़दम मरहला-दार-ओ-सलीब आज भी है

साहिर लुधियानवी

अब आएँ या न आएँ इधर पूछते चलो

साहिर लुधियानवी

मेरे मरने की भी उन को न ख़बर दी जाए

साहिर होशियारपुरी

चार उंसुर से बना है जिस्म-ए-पाक

साहिर देहल्वी

किस तसव्वुर के तहत रब्त की मंज़िल में रहा

साहिल अहमद

नौ-ब-नौ एक उमडता हुआ तूफ़ान था मैं

साहिल अहमद

मुझ पे ऐसा कोई शे'र नाज़िल न हो

सहबा अख़्तर

इस बे तुलूअ' शब में क्या तालेअ'-आज़माई

सहबा अख़्तर

कहीं वो चेहरा-ए-ज़ेबा नज़र नहीं आया

सहर अंसारी

साक़ी की इक निगाह के अफ़्साने बन गए

साग़र सिद्दीक़ी

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