गंतव्य Poetry (page 46)

याद आए हैं अहद-ए-जुनूँ के खोए हुए दिलदार बहुत

अली सरदार जाफ़री

मौसम-ए-रंग भी है फ़स्ल-ए-ख़िज़ाँ भी तारी

अली सरदार जाफ़री

कभी ख़ंदाँ कभी गिर्यां कभी रक़सा चलिए

अली सरदार जाफ़री

काम अब कोई न आएगा बस इक दिल के सिवा

अली सरदार जाफ़री

अब आ गया है जहाँ में तो मुस्कुराता जा

अली सरदार जाफ़री

वार्निंग

अली साहिल

शौक़-ए-मंज़िल हम-सफ़र है जज़्बा-ए-दिल राहबर

अली जव्वाद ज़ैदी

दिल का लहू निगाह से टपका है बार-हा

अली जव्वाद ज़ैदी

दिखा दी मैं ने वो मंज़िल जो इन दोनों के आगे है

अली जव्वाद ज़ैदी

ज़र्रा-ए-ना-तापीदा की ख़्वाहिश-ए-आफ़ताब क्या

अली जव्वाद ज़ैदी

उफ़ वो इक हर्फ़-ए-तमन्ना जो हमारे दिल में था

अली जव्वाद ज़ैदी

नींद आ गई थी मंज़िल-ए-इरफ़ाँ से गुज़र के

अली जव्वाद ज़ैदी

कम-ज़र्फ़ एहतियात की मंज़िल से आए हैं

अली जव्वाद ज़ैदी

हम-सफ़र गुम रास्ते ना-पैद घबराता हूँ मैं

अली जव्वाद ज़ैदी

दीन ओ दिल पहली ही मंज़िल में यहाँ काम आए

अली जव्वाद ज़ैदी

दबी आवाज़ में करती थी कल शिकवे ज़मीं मुझ से

अली जव्वाद ज़ैदी

बारिश के घनघोर हवाले गिनता रहता हूँ

अली इमरान

हरीम-ए-काबा बना दी वो सर-ज़मीं मैं ने

अली अख़्तर अख़्तर

हरीम-ए-का'बा बना दी वो सर-ज़मीं मैं ने

अली अख़्तर अख़्तर

सफ़ीर-ए-लैला-4

अली अकबर नातिक़

मौत आई है ज़माने की तो मर जाने दो

अलीम उस्मानी

जिस दिन से उठ के हम तिरी महफ़िल से आए हैं

अलीम उस्मानी

इक राज़-ए-ग़म-ए-दिल जब ख़ुद रह न सका दिल तक

अलीम मसरूर

इक जुनूँ कहिए उसे जो मिरे सर से निकला

अलीम मसरूर

किसी के वादा-ए-फ़र्दा पर ए'तिबार तो है

अलीम अख़्तर

दर्द की इक लहर बल खाती है यूँ दिल के क़रीब

आलमताब तिश्ना

उर्दू

आलम मुज़फ्फ़र नगरी

तुम जिस को ढूँडते हो ये महफ़िल नहीं है वो

आलम ख़ुर्शीद

तू साथ है मगर कहीं तेरा पता नहीं

अकरम नक़्क़ाश

गहरी सूनी राह और तन्हा सा मैं

अकरम नक़्क़ाश

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