नाम Poetry (page 19)
पुरखों से जो मिली है वो दौलत भी ले न जाए
शीन काफ़ निज़ाम
आँखों में रात ख़्वाब का ख़ंजर उतर गया
शीन काफ़ निज़ाम
दीप जले तो दीप बुझाने आते हैं
शाज़िया अकबर
आगे आगे कोई मिशअल सी लिए चलता था
शाज़ तमकनत
दर-गुज़र
शाज़ तमकनत
यही सफ़र की तमन्ना यही थकन की पुकार
शाज़ तमकनत
मिरे नसीब ने जब मुझ से इंतिक़ाम लिया
शाज़ तमकनत
जाने वाले तुझे कब देख सकूँ बार-ए-दिगर
शाज़ तमकनत
बड़े ख़ुलूस से दामन पसारता है कोई
शाज़ तमकनत
वक़्त आख़िर ले गया वो शोख़ियाँ वो बाँकपन
शायान क़ुरैशी
शिकोह-ए-ज़ात से दुश्मन का लश्कर काँप जाता है
शायान क़ुरैशी
अबरू है का'बा आज से ये नाम रख दिया
शौक़ क़िदवाई
ज़ुल्फ़-ए-दराज़ से ये नुमायाँ है ग़ालिबन
शौक़ बहराइची
शैख़ ओ बरहमन दोनों हैं बर-हक़ दोनों का हर काम मुनासिब
शौक़ बहराइची
नई बज़्म-ए-ऐश-ओ-नशात में ये मरज़ सुना है कि आम है
शौक़ बहराइची
ख़िलाफ़-ए-हंगामा-ए-तशद्दुद क़दम जो हम ने बढ़ा दिए हैं
शौक़ बहराइची
जो मस्त-ए-जाम-ए-बादा-ए-इरफ़ाँ न हो सका
शौक़ बहराइची
है शैख़ ओ बरहमन पर ग़ालिब गुमाँ हमारा
शौक़ बहराइची
इन ही का नाम मोहब्बत इन ही का नाम जुनूँ
शौकत थानवी
हो राहज़न की हिदायत कि राहबर के फ़रेब
शौकत थानवी
ज़िंदगी का सफ़र ख़त्म होता रहा तुम मुझे दम-ब-दम याद आते रहे
शौकत परदेसी
मौत का फ़रिश्ता
शौकत आबिदी
पलट के दौर-ए-ज़माँ सुब्ह-ओ-शाम पैदा कर
शातिर हकीमी
दर से मायूस तिरे तालिब-ए-इकराम चले
शातिर हकीमी
कुतिया
शारिक़ कैफ़ी
जनाज़े में तो आओगे न मेरे
शारिक़ कैफ़ी
एक कैंसर के मरीज़ की बड़-बड़
शारिक़ कैफ़ी
कभी ख़ुद को छूकर नहीं देखता हूँ
शारिक़ कैफ़ी
पहुँच गया था वो कुछ इतना रौशनी के क़रीब
शारिब मौरान्वी
माह-ए-मुनीर
शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी
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