नाम Poetry (page 21)

न पैमाने खनकते हैं न दौर-ए-जाम चलता है

शकील बदायुनी

मौसम-ए-गुल साथ ले कर बर्क़ ओ दाम आ ही गया

शकील बदायुनी

ख़ुश हूँ कि मिरा हुस्न-ए-तलब काम तो आया

शकील बदायुनी

करने दो अगर क़त्ताल-ए-जहाँ तलवार की बातें करते हैं

शकील बदायुनी

जाम गर्दिश में है दर-बंद हैं मय-ख़ानों के

शकील बदायुनी

जादा-ए-इश्क़ में गिर गिर के सँभलते रहना

शकील बदायुनी

हाए इस मजबूरी-ए-ज़ौक़-ए-नज़र को क्या करूँ

शकील बदायुनी

ग़म-ए-आशिक़ी से कह दो रह-ए-आम तक न पहुँचे

शकील बदायुनी

ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया

शकील बदायुनी

आख़िरी वक़्त है आख़िरी साँस है ज़िंदगी की है शाम आख़िरी आख़िरी

शकील बदायुनी

मुझ पे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मिरे साथ न चल

शकील आज़मी

कहीं से चाँद कहीं से क़ुतुब-नुमा निकला

शकील आज़मी

अपनी हस्ती को मिटा दूँ तिरे जैसा हो जाऊँ

शकील आज़मी

वो सामने था फिर भी कहाँ सामना हुआ

शकेब जलाली

वही झुकी हुई बेलें वही दरीचा था

शकेब जलाली

रौशन हैं दिल के दाग़ न आँखों के शब-चराग़

शकेब जलाली

ख़्वाब-ए-गुल-रंग के अंजाम पे रोना आया

शकेब जलाली

ख़मोशी बोल उठ्ठे हर नज़र पैग़ाम हो जाए

शकेब जलाली

ग़म-ए-उल्फ़त मिरे चेहरे से अयाँ क्यूँ न हुआ

शकेब जलाली

बस वही लम्हा आँख देखेगी

शाइस्ता यूसुफ़

शाम आ कर झरोकों में बैठी रहे

शाइस्ता मुफ़्ती

आइना देखा तो सूरत अपनी पहचानी गई

शाइस्ता मुफ़्ती

तुम्हारे इश्क़ में हम नंग-ओ-नाम भूल गए

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तिरी निगह से गए खुल किवाड़ छाती के

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जामा उर्यानी का क़ामत पर मिरी आया है रास्त

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इस क़दर की सर्फ़ तस्ख़ीर-ए-परी-रूयाँ में उम्र

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

आरिज़ से उस के ज़ुल्फ़ में क्यूँ-कर है रौशनी

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तुम्हारे इश्क़ में हम नंग-ओ-नाम भूल गए

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

क्या सताते हो रहो बंदा-नवाज़

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इश्क़ नहीं कोई नहंग है यारो

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

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