नाम Poetry (page 23)

निस्बत रहे तुम से सदा हज़रत निज़ामुद्दीन-जी

शहरयार

किस किस तरह से मुझ को न रुस्वा किया गया

शहरयार

जो चाहती दुनिया है वो मुझ से नहीं होगा

शहरयार

हुजूम-ए-दर्द मिला ज़िंदगी अज़ाब हुई

शहरयार

गुज़रे थे हुसैन इब्न-ए-अली रात इधर से

शहरयार

दिल में रखता है न पलकों पे बिठाता है मुझे

शहरयार

कार-ए-जहाँ दराज़ है

शहराम सर्मदी

सुन रखा था तजरबा लेकिन ये पहला था मिरा

शहराम सर्मदी

रह-ए-वफ़ा में रहे ये निशान-ए-ख़ातिर बस

शहराम सर्मदी

नदी थी कश्तियाँ थीं चाँदनी थी झरना था

शहराम सर्मदी

इस सोच में ही मरहला-ए-शब गुज़र गया

शहराम सर्मदी

कभी जो मारका ख़्वाबों से रत-जगों का हुआ

शहनाज़ नूर

उलझा उस की दीद में

शहनवाज़ ज़ैदी

तेरी तख़्लीक़ तिरा रंग हवाला था मिरा

शहनवाज़ ज़ैदी

सभी रास्ते तिरे नाम के सभी फ़ासले तिरे नाम के

शहनवाज़ ज़ैदी

हर किसी ख़्वाब के चेहरे पे लिखूँ नाम तिरा

शहनवाज़ ज़ैदी

दिल भी दाग़-ए-नक़्श-ए-कुहन से बुझा हुआ था

शहनवाज़ ज़ैदी

वफ़ा-परस्त जहान-ए-वफ़ा को ले डूबे

शाहजहाँ बानो याद

मैं ज़हर रही हर शाम रही

शाहिदा तबस्सुम

सराब-ए-शब भी है ख़्वाब-ए-शिकस्ता-पा भी है

शाहिदा हसन

बिन माँगे मिल रहा हो तो ख़्वाहिश फ़ुज़ूल है

शाहिद ज़की

मजमा' मिरे हिसार में सैलानियों का है

शाहिद मीर

ख़ौफ़ से अब यूँ न अपने घर का दरवाज़ा लगा

शाहिद मीर

ऐसे भी कुछ ग़म होते हैं

शाहिद मीर

बू-ए-पैराहन-ए-सदा आए

शाहिद माहुली

सह-पहर ही से कोई शक्ल बनाती है ये शाम

शाहिद लतीफ़

ज़ख़्म-ए-जिगर को दस्त-ए-जराहत से पूछिए

शाहिद कमाल

सोचता है किस लिए तू मेरे यार दे मुझे

शाहिद कमाल

में क्या हूँ कौन हूँ ये बताने से मैं रहा

शाहिद कमाल

हमें ख़बर भी नहीं यार खींचता है कोई

शाहिद कमाल

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