नाम Poetry (page 24)
ब-हर्फ़-ए-सूरत इंकार तोड़ दी मैं ने
शाहिद कमाल
अब्र लिखती है कहीं और घटा लिखती है
शाहिद कमाल
कोरे काग़ज़ पे मिरा नक़्श उतारे कोई
शाहिद कलीम
अंधेरे घर में चराग़ों से कुछ न काम लिया
शाहिद कलीम
कैसे तोड़ी गई ये हद्द-ए-अदब पूछते हैं
शाहिद जमाल
शहर-ए-निगाराँ में फिरते हैं हम आवारा रात ढले
शाहिद इश्क़ी
रात भी बाक़ी है सहबा भी शीशा भी पैमाना भी
शाहिद इश्क़ी
नक़्द-ए-दिल-ओ-जाँ उस की ख़ातिर रहन-ए-जाम करो
शाहिद इश्क़ी
मिरे क़रीब से गुज़रा इक अजनबी की तरह
शाहिद इश्क़ी
हर मर्ग-ए-आरज़ू का निशाँ देर तक रहा
शाहिद इश्क़ी
कभी ग़मी के नाम पर कभी ख़ुशी की आड़ में
शाहिद फ़रीद
हम दोनों ने नाम लिखा था साहिल पर
शाहिद फ़रीद
ए'तिराफ़
शाहिद अख़्तर
बाज़ार
शाहिद अख़्तर
सजाएँ महफ़िल-ए-याराँ न शग़्ल-ए-जाम करें
शाहिद अख़्तर
किसी की ज़ुल्फ़-ए-शिकन-दर-शिकन की बात हुई
शाहिद अख़्तर
ज़िंदगी पाने की हसरत है तो मरता क्यूँ है
शाहिद अहमद शोएब
ऐ निगार-ए-ग़म-ओ-आलाम तिरी उम्र दराज़
शाहिद अहमद शोएब
ऐ निगार-ए-ग़म-ओ-आलाम तिरी उम्र दराज़
शाहिद अहमद शोएब
गुलाब-ब-कफ़
शाहीन ग़ाज़ीपुरी
दिल जहाँ भी डूबा है उन की याद आई है
शाहीन ग़ाज़ीपुरी
बदन के रूप का एजाज़ अंग अंग थी वो
शाहीन ग़ाज़ीपुरी
नक़्श था और नाम था ही नहीं
शाहीन अब्बास
दाने के बा'द कुछ नहीं दाम के बा'द कुछ नहीं
शाहीन अब्बास
यादों की दीवार गिराता रहता हूँ
शाहबाज़ रिज़्वी
कितने गुलशन कि सजे थे मिरे इक़रार के नाम
शहबाज़ ख़्वाजा
कब गवारा है मुझे और कहीं पर चमके
शहबाज़ ख़्वाजा
भटक रहे हैं ग़म-ए-आगही के मारे हुए
शहबाज़ ख़्वाजा
दवाम
शहाब जाफ़री
मा'दूम होती ख़ुश्बू
शहाब अख़्तर
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