नाम Poetry (page 22)

होवे वो शोख़-चश्म अगर मुझ से चार चश्म

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दहन है तंग शकर और शकर तिरा है कलाम

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

औक़ात-ए-शैख़ गो कि सुजूद ओ क़याम है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

अब की चमन में गुल का ने नाम ओ ने निशाँ है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

आज दिलबर के नाम को रट रट

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

आब-ए-हयात जा के किसू ने पिया तो क्या

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दिन वस्ल के रंज-ए-शब-ए-ग़म भूल गए हैं

शैख़ मीर बख़्श मसरूर

रदीफ़ क़ाफ़िया बंदिश ख़याल लफ़्ज़-गरी

शहज़ाद क़ैस

क्यूँ बुलाती है मुझे दुनिया उसी के नाम से

शहज़ाद अहमद

जिस के बाइस अभी ठंडक है मिरे सीने में

शहज़ाद अहमद

भूल कर भी कोई लेता नहीं अब नाम-ए-वफ़ा

शहज़ाद अहमद

सुकून कुछ तो मिला दिल का माजरा लिख कर

शहज़ाद अहमद

शहर का शहर अगर आए भी समझाने को

शहज़ाद अहमद

जो दिल में खटकती है कभी कह भी सकोगे

शहज़ाद अहमद

इस भरे शहर में आराम मैं कैसे पाऊँ

शहज़ाद अहमद

इबलीस भी रख लेते हैं जब नाम फ़रिश्ते

शहज़ाद अहमद

हिज्र की रात मिरी जाँ पे बनी हो जैसे

शहज़ाद अहमद

दरिया कभी इक हाल में बहता न रहेगा

शहज़ाद अहमद

उम्र का लम्बा हिस्सा कर के दानाई के नाम

शहरयार

सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का

शहरयार

क्यूँ आज उस का ज़िक्र मुझे ख़ुश न कर सका

शहरयार

किस किस तरह से मुझ को न रुस्वा किया गया

शहरयार

बे-नाम से इक ख़ौफ़ से दिल क्यूँ है परेशाँ

शहरयार

वामांदगी-ए-शौक़

शहरयार

ये क़ाफ़िले यादों के कहीं खो गए होते

शहरयार

ये क्या जगह है दोस्तो ये कौन सा दयार है

शहरयार

तुझ से बिछड़े हैं तो अब किस से मिलाती है हमें

शहरयार

तेरी साँसें मुझ तक आते बादल हो जाएँ

शहरयार

तमाम ख़ल्क़-ए-ख़ुदा देख के ये हैराँ है

शहरयार

सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का

शहरयार

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