नज़र Poetry (page 33)

मेरी बर्बादी को चश्म-ए-मो'तबर से देखिए

शकील बदायुनी

लतीफ़ पर्दों से थे नुमायाँ मकीं के जल्वे मकाँ से पहले

शकील बदायुनी

ला रहा है मय कोई शीशे में भर के सामने

शकील बदायुनी

ख़ुश हूँ कि मिरा हुस्न-ए-तलब काम तो आया

शकील बदायुनी

कब तक 'शकील' दिल को दुआ कीजिएगा आप

शकील बदायुनी

जो दिल पे गुज़रती है वो समझा नहीं सकते

शकील बदायुनी

इस दर्जा बद-गुमाँ हैं ख़ुलूस-ए-बशर से हम

शकील बदायुनी

हज़ार क़ैद-ए-ख़िज़ाँ से छुट कर बहार का आसरा करेंगे

शकील बदायुनी

हज़ार क़ैद-ए-जवाँ से छुट कर बहार का आसरा करेंगे

शकील बदायुनी

हर गोशा-ए-नज़र में समाए हुए हो तुम

शकील बदायुनी

हाए इस मजबूरी-ए-ज़ौक़-ए-नज़र को क्या करूँ

शकील बदायुनी

गुलशन हो निगाहों में तो जन्नत न समझना

शकील बदायुनी

ग़म-ए-इश्क़ रह गया है ग़म-ए-जुस्तुजू में ढल कर

शकील बदायुनी

ग़म-ए-आशिक़ी से कह दो रह-ए-आम तक न पहुँचे

शकील बदायुनी

ग़म से कहाँ ऐ इश्क़ मफ़र है

शकील बदायुनी

दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ

शकील बदायुनी

दिल में किसी ख़लिश का गुज़र चाहता हूँ मैं

शकील बदायुनी

दिल मरकज़-ए-हिजाब बनाया न जाएगा

शकील बदायुनी

दिल लज़्ज़त-ए-निगाह करम पा के रह गया

शकील बदायुनी

बे-ख़ुदी है न होशियारी है

शकील बदायुनी

बेकार गई आड़ तिरे पर्दा-ए-दर की

शकील बदायुनी

बस इक निगाह-ए-करम है काफ़ी अगर उन्हें पेश-ओ-पस नहीं है

शकील बदायुनी

बदले बदले मिरे ग़म-ख़्वार नज़र आते हैं

शकील बदायुनी

अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे

शकील बदायुनी

अब तक शिकायतें हैं दिल-ए-बद-नसीब से

शकील बदायुनी

आँखों से दूर सुब्ह के तारे चले गए

शकील बदायुनी

आँख से आँख मिलाता है कोई

शकील बदायुनी

आख़िरी वक़्त है आख़िरी साँस है ज़िंदगी की है शाम आख़िरी आख़िरी

शकील बदायुनी

आज फिर गर्दिश-ए-तक़दीर पे रोना आया

शकील बदायुनी

आदाब-ए-आशिक़ी से बेगाना कह रही है

शकील बदायुनी

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