नज़र Poetry (page 88)

दर्स-ए-आराम मेरे ज़ौक़-ए-सफ़र ने न दिया

एज़ाज़ अफ़ज़ल

चलो कुछ तो राह तय हो न चले तो भूल होगी

एज़ाज़ अफ़ज़ल

आज दिल है कि सर-ए-शाम बुझा लगता है

एज़ाज़ अफ़ज़ल

किस क़दर मसअला-ए-शाम-ओ-सहर बदला है

एज़ाज़ अफ़ज़ल

जिस्म ही पामाल हो जाए तो सर क्या कीजिए

एज़ाज़ अफ़ज़ल

ज़ीस्त में ग़म हैं हम-सफ़र फिर भी

एलिज़ाबेथ कुरियन मोना

जग में आता है हर बशर तन्हा

एलिज़ाबेथ कुरियन मोना

ख़ून-ए-नाहक़ थी फ़क़त दुनिया-ए-आब-ओ-गिल की बात

एजाज़ वारसी

कार-ए-ख़ैर इतना तो ऐ लग़्ज़िश-ए-पा हो जाता

एजाज़ वारसी

उसे ये हक़ है कि वो मुझ से इख़्तिलाफ़ करे

एजाज़ रहमानी

अब कर्ब के तूफ़ाँ से गुज़रना ही पड़ेगा

एजाज़ रहमानी

निशान-ए-ज़िंदगी

एजाज़ गुल

जो क़िस्सा-गो ने सुनाया वही सुना गया है

एजाज़ गुल

तकमील

एजाज़ फ़ारूक़ी

सरोश

एजाज़ फ़ारूक़ी

रौशनी को तीरगी का क़हर बन कर ले गया

एजाज़ अासिफ़

ख़ुद को जब लग गई नज़र अपनी

एजाज़ तालिब

चले थे घर से तो हम दर्द की दवा के लिए

एजाज़ अहमद एजाज़

कितना कमज़ोर है ईमान पता लगता है

अहया भोजपुरी

तिरे बदन की नज़ाकतों का हुआ है जब हम-रिकाब मौसम

एहतिशामुल हक़ सिद्दीक़ी

तिरे बदन की नज़ाकतों का हुआ है जब हम-रिकाब मौसम

एहतिशामुल हक़ सिद्दीक़ी

हुसूल-ए-मक़्सद में आख़िरश यूँ रहेगी क़िस्मत दख़ील कब तक

एहतिशामुल हक़ सिद्दीक़ी

उन आँखों को नज़र क्या आ गया है

एहतिशाम हुसैन

तुझे पसंद जो दिल की लगन नहीं आई

एहतिशाम हुसैन

देख कर जादा-ए-हस्ती पे सुबुक-गाम मुझे

एहतिशाम हुसैन

तौक़ीर अँधेरों की बढ़ा दी गई शायद

एहतराम इस्लाम

तौक़ीर अँधेरों की बढ़ा दी गई शायद

एहतराम इस्लाम

सुर्ख़ मौसम की कहानी है पुरानी हो न हो

एहतराम इस्लाम

फ़ज़ा-ए-शाम ज़िया-ए-सहर उसी से मिली

एहतराम इस्लाम

फ़ज़ा-ए-शाम ज़िया-ए-सहर उसी से मिली

एहतराम इस्लाम

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