नज़र Poetry (page 89)

ढूँड साया न शजर आगे भी

एहतराम इस्लाम

ढूँड साया न शजर आगे भी

एहतराम इस्लाम

हुस्न को दुनिया की आँखों से न देख

एहसान दानिश

यूँ उस पे मिरी अर्ज़-ए-तमन्ना का असर था

एहसान दानिश

रंग-ए-तहज़ीब-ओ-तमद्दुन के शनासा हम भी हैं

एहसान दानिश

रानाई-ए-कौनैन से बे-ज़ार हमीं थे

एहसान दानिश

परस्तिश-ए-ग़म का शुक्रिया क्या तुझे आगही नहीं

एहसान दानिश

मिरे मिटाने की तदबीर थी हिजाब न था

एहसान दानिश

कुछ लोग जो सवार हैं काग़ज़ की नाव पर

एहसान दानिश

कल रात कुछ अजीब समाँ ग़म-कदे में था

एहसान दानिश

इश्क़ को तक़लीद से आज़ाद कर

एहसान दानिश

हंगामा-ए-ख़ुदी से तू बे-नियाज़ हो जा

एहसान दानिश

दिल की रग़बत है जब आप ही की तरफ़

एहसान दानिश

मंज़र है अभी दूर ज़रा हद्द-ए-नज़र से

डॉ. पिन्हाँ

शौक़ बाक़ी नहीं बाक़ी नहीं अब जोश-ओ-ख़रोश

डॉक्टर आज़म

ख़ुदा भी जानता है ख़ूब जो मक्कार बैठे हैं

डॉक्टर आज़म

झुर्रियों की क़तार देखो तो

डॉक्टर आज़म

अफ़सोस बनी ही नहीं पहचान अभी तक

डॉक्टर आज़म

हज़ारों बार कह कर बेवफ़ा को बा-वफ़ा मैं ने

दिवाकर राही

चाक पर मिट्टी को मर जाना है

दिनेश नायडू

जब कोई ज़ख़्म उभरता है किनारों जैसा

दिलदार हाश्मी

शदीद गरमी के मौसम में मुशाइरा

दिलावर फ़िगार

मौसीक़ी से इलाज

दिलावर फ़िगार

मर्दुम-गज़ीदा इंसान का इलाज

दिलावर फ़िगार

कराची की बस

दिलावर फ़िगार

इश्क़ का परचा

दिलावर फ़िगार

'ग़ालिब' को बुरा क्यूँ कहो

दिलावर फ़िगार

इलिएट्स-गर्ल्स-कॉलेज और कुल पाक ओ हिन्द मुशाएरा

दिलावर फ़िगार

क्रिकेट और मुशाइरा

दिलावर फ़िगार

चोर-साहिब से दरख़्वास्त

दिलावर फ़िगार

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