नज़र Poetry (page 99)

दिल में हमारे अब कोई अरमाँ नहीं रहा

अज़ीज़ वारसी

सफ़र मुदाम सफ़र

अज़ीज़ तमन्नाई

मुजस्समा

अज़ीज़ तमन्नाई

ज़िंदगी यूँ तो गुज़र जाती है आराम के साथ

अज़ीज़ तमन्नाई

यूँही कटे न रहगुज़र-ए-मुख़्तसर कहीं

अज़ीज़ तमन्नाई

उफ़ुक़ के उस पार कर रहा है कोई मिरा इंतिज़ार शायद

अज़ीज़ तमन्नाई

पाते हैं कुछ कमी सी तस्वीर-ए-ज़िंदगी में

अज़ीज़ तमन्नाई

ख़ल्वत हुई है अंजुमन-आरा कभी कभी

अज़ीज़ तमन्नाई

जिस को चलना है चले रख़्त-ए-सफ़र बाँधे हुए

अज़ीज़ तमन्नाई

अब कौन सी मता-ए-सफ़र दिल के पास है

अज़ीज़ तमन्नाई

बाक़ीस्त शब-ए-फ़ित्ना

अज़ीज़ क़ैसी

आईने से

अज़ीज़ क़ैसी

तमीज़ अपने में ग़ैर में क्या तुम्हें जो अपना न कर सके हम

अज़ीज़ क़ैसी

अपनों के करम से या क़ज़ा से

अज़ीज़ क़ैसी

दश्त-ओ-सहरा में समुंदर में सफ़र है मेरा

अज़ीज़ नबील

आएँगे नज़र सुब्ह के आसार में हम लोग

अज़ीज़ नबील

ये तेरी आरज़ू में बढ़ी वुसअत-ए-नज़र

अज़ीज़ लखनवी

लज़्ज़त-ए-ग़म

अज़ीज़ लखनवी

बचपने की याद

अज़ीज़ लखनवी

आतिश-ए-ख़ामोश

अज़ीज़ लखनवी

ये ग़लत है ऐ दिल-ए-बद-गुमाँ कि वहाँ किसी का गुज़र नहीं

अज़ीज़ लखनवी

वो निगाहें क्या कहूँ क्यूँ कर रग-ए-जाँ हो गईं

अज़ीज़ लखनवी

परतव-ए-हुस्न कहीं अंजुमन-अफ़रोज़ तो हो

अज़ीज़ लखनवी

न हुई हम से शब बसर न हुई

अज़ीज़ लखनवी

क्यूँ न हो शौक़ तिरे दर पे जबीं-साई का

अज़ीज़ लखनवी

काश सुनते वो पुर-असर बातें

अज़ीज़ लखनवी

जीते हैं कैसे ऐसी मिसालों को देखिए

अज़ीज़ लखनवी

जाम ख़ाली जहाँ नज़र आया

अज़ीज़ लखनवी

इश्क़ जो मेराज का इक ज़ीना है

अज़ीज़ लखनवी

इस वहम की इंतिहा नहीं है

अज़ीज़ लखनवी

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