नज़र Poetry (page 9)

इस इल्तिफ़ात पर कोई दामन न थाम ले

शमीम जयपुरी

इलाही काश ग़म-ए-इश्क़ काम कर जाए

शमीम जयपुरी

फ़ुर्क़त की भयानक रातों को इस तरह गुज़ारा करता हूँ

शमीम जयपुरी

परछाइयों की बात न कर रंग-ए-हाल देख

शमीम हनफ़ी

ये किस का जल्वा-ए-हैरत-फ़ज़ा निगाह में है

शकूर जावेद

बे-पर्दा उस का चेहरा-ए-पुर-नूर तो हुआ

शाकिर कलकत्तवी

शग़ुफ़्तगी-ए-दिल-ए-कारवाँ को क्या समझे

शकील बदायुनी

मुझे भूल जा

शकील बदायुनी

ज़िंदगी उन की चाह में गुज़री

शकील बदायुनी

ज़िंदगी उन की चाह में गुज़री

शकील बदायुनी

उन के बग़ैर हम जो गुलिस्ताँ में आ गए

शकील बदायुनी

तौफ़-ए-हरम न देर की गहराइयों में है

शकील बदायुनी

शिकवे तिरे हुज़ूर किए जा रहा हूँ मैं

शकील बदायुनी

राह-ए-ख़ुदा में आलम-ए-रिन्दाना मिल गया

शकील बदायुनी

मौसम-ए-गुल साथ ले कर बर्क़ ओ दाम आ ही गया

शकील बदायुनी

लुत्फ़-ए-निगाह-ए-नाज़ की तोहमत उठाए कौन

शकील बदायुनी

लतीफ़ पर्दों से थे नुमायाँ मकीं के जल्वे मकाँ से पहले

शकील बदायुनी

जल्वा-ए-हुस्न-ए-करम का आसरा करता हूँ मैं

शकील बदायुनी

इश्क़ का कोई ख़ैर-ख़्वाह तो है

शकील बदायुनी

हम उन की अंजुमन का समाँ बन के रह गए

शकील बदायुनी

हर गोशा-ए-नज़र में समाए हुए हो तुम

शकील बदायुनी

ग़म-ए-हयात भी आग़ोश-ए-हुस्न-ए-यार में है

शकील बदायुनी

ग़म-ए-आशिक़ी से कह दो रह-ए-आम तक न पहुँचे

शकील बदायुनी

दिल लज़्ज़त-ए-निगाह करम पा के रह गया

शकील बदायुनी

बस इक निगाह-ए-करम है काफ़ी अगर उन्हें पेश-ओ-पस नहीं है

शकील बदायुनी

बहार आई किसी का सामना करने का वक़्त आया

शकील बदायुनी

परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है

शकील आज़मी

शफ़क़ जो रू-ए-सहर पर गुलाल मलने लगी

शकेब जलाली

जहाँ तलक भी ये सहरा दिखाई देता है

शकेब जलाली

जब तक ग़म-ए-जहाँ के हवाले हुए नहीं

शकेब जलाली

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