नज़र Poetry (page 11)

हुवल-इश्क़

शहराम सर्मदी

सभी रास्ते तिरे नाम के सभी फ़ासले तिरे नाम के

शहनवाज़ ज़ैदी

सवाद-ए-शाम से ता-सुब्ह-ए-बे-किनार गई

शाहिदा हसन

लहू का दाग़ न था ज़ख़्म का निशान न था

शाहिद कलीम

मिरे क़रीब से गुज़रा इक अजनबी की तरह

शाहिद इश्क़ी

पराए शहर में ख़ुशबू तलाश लेते हैं

शाहबाज़ रिज़्वी

मचलते रहते हैं बिस्तर पे ख़्वाब मेरे लिए

शहबाज़ नदीम ज़ियाई

ये ज़र्द फूल ये काग़ज़ पे हर्फ़ गीले से

शहबाज़ ख़्वाजा

बसान-ए-आइना हम ने तो चश्म वा कर ली

शाह नसीर

दिखा दो गर माँग अपनी शब को तो हश्र बरपा हो कहकशाँ पर

शाह नसीर

मुझे साक़ी-ए-चश्म-ए-यार ने अजब एक जाम पिला दिया

शाह आसिम

मेहमाँ है कोई दम का ज़माना शबाब का

शाग़िल क़ादरी

पर्दा पड़ा हुआ था ख़ुदी ने उठा दिया

शफ़ीक़ जौनपुरी

कब से इस दुनिया को सरगर्म-ए-सफ़र पाता हूँ मैं

शफ़ीक़ जौनपुरी

आँखों से मअ'नी-ए-सुख़न-ए-मीर देखते

शफ़क़ सुपुरी

मज़ा शबाब का जब है कि बा-ख़ुदा भी रहे

शायर फतहपुरी

जो कैफ़-ए-इश्क़ से ख़ाली हो ज़िंदगी किया है

शायर फतहपुरी

फ़साना-ए-सितम-ए-काएनात कहते हैं

शायर फतहपुरी

सर-ए-बज़्म मेरी नज़र से जब वो निगाह-ए-होश-रुबा मिली

शादाँ इंदौरी

जैसे मिरी निगाह ने देखा न हो कभी

शाद अज़ीमाबादी

ता-उम्र आश्ना न हुआ दिल गुनाह का

शाद अज़ीमाबादी

क्यूँ हो बहाना-जू न क़ज़ा सर से पाँव तक

शाद अज़ीमाबादी

काबा ओ दैर में जल्वा नहीं यकसाँ उन का

शाद अज़ीमाबादी

अब भी इक उम्र पे जीने का न अंदाज़ आया

शाद अज़ीमाबादी

हर आन एक नया इम्तिहान सर पर है

शबनम रूमानी

सदा रहेगी यही रवानी रवाँ है पानी

शब्बीर शाहिद

माँगा था हम ने दिन वो सियह रात दे गया

शबाब ललित

उम्मीद के उफ़ुक़ से न उट्ठा ग़ुबार तक

शानुल हक़ हक़्क़ी

जहान-ए-दिल में हुए इंक़लाब और ही कुछ

शानुल हक़ हक़्क़ी

ऐ दिल तिरे ख़याल की दुनिया कहाँ से लाएँ

शानुल हक़ हक़्क़ी

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