पुल Poetry (page 19)

कभी तो शाम ढले अपने घर गए होते

बशीर बद्र

जब रात की तन्हाई दिल बन के धड़कती है

बशीर बद्र

जुदा भी हो के वो इक पल कभी जुदा न हुआ

बशीर अहमद बशीर

दूर तक चारों तरफ़ मेरे सिवा कोई न था

बशीर अहमद बशीर

जब छाई घटा लहराई धनक इक हुस्न-ए-मुकम्मल याद आया

बशर नवाज़

बाज़ार-ए-ज़िंदगी में जमे कैसे अपना रंग

बशर नवाज़

आहट पे कान दर पे नज़र इस तरह न थी

बशर नवाज़

एक पल में वहाँ से हम उट्ठे

बाक़ी सिद्दीक़ी

दाग़-ए-दिल हम को याद आने लगे

बाक़ी सिद्दीक़ी

रह-रवाँ कहते हैं जिस को जरस-ए-महमिल है

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

नर्गिस-ए-मस्त तिरी जाए जो तुल बरसर-ए-गुल

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

अगरचे दिल को ले साथ अपने आया अश्क मिरा

बाक़र आगाह वेलोरी

क्या कहें क्या हुस्न का आलम रहा

बक़ा बलूच

साक़ी खुलता है पैमाना खुलता है

बलवान सिंह आज़र

सर्द, तारीक रात

बलराज कोमल

ड्रग स्टोर

बलराज कोमल

ऐम्बुलेंस

बलराज कोमल

ऐ वाए इंक़लाब ज़माने के जौर से

ज़फ़र

टुकड़े नहीं हैं आँसुओं में दिल के चार पाँच

ज़फ़र

ज़रूरतों की हमाहमी में जो राह चलते भी टोकती है वो शाइ'री है

बद्र-ए-आलम ख़लिश

है बहुत मुश्किल निकलना शहर के बाज़ार में

बदीउज़्ज़माँ ख़ावर

हवा के लब पे नए इंतिसाब से कुछ हैं

अज़रा वहीद

आने वाले कल की ख़ातिर हर हर पल क़ुर्बान किया

अज़रा नक़वी

कैसे कैसे स्वाँग रचाए हम ने दुनिया-दारी में

अज़रा नक़वी

चाँद सा चेहरा कुछ इतना बेबाक हुआ

अज़्म शाकरी

सफ़र मुदाम सफ़र

अज़ीज़ तमन्नाई

परछाइयाँ

अज़ीज़ तमन्नाई

दिल में वो दर्द उठा रात कि हम सो न सके

अज़ीज़ तमन्नाई

ब-नाम-ए-इब्न-ए-आदम

अज़ीज़ क़ैसी

बैन-उल-अदमैन

अज़ीज़ क़ैसी

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.