रंग Poetry (page 10)

इश्क़ में सब्र-ओ-रज़ा दरकार है

वली मोहम्मद वली

छुपा हूँ मैं सदा-ए-बाँसुली में

वली मोहम्मद वली

अगर गुलशन तरफ़ वो नौ-ख़त-ए-रंगीं-अदा निकले

वली मोहम्मद वली

ब-रंग-ए-नग़मा बिखर जाना चाहते हैं हम

वाली आसी

ज़िंदगी दस्त-ए-तह-ए-संग रही है बरसों

वकील अख़्तर

नादान होशियार बने जिन के रूप से

वाजिद सहरी

याद में अपने यार-ए-जानी की

वाजिद अली शाह अख़्तर

सुना है कूच तो उन का पर इस को क्या कहिए

वाजिद अली शाह अख़्तर

नायाब है सुकून दिल-ए-बे-क़रार में

वाजिद अली शाह अख़्तर

यहाँ हर आने वाला बन के इबरत का निशाँ आया

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

हुए हैं गुम जिस की जुस्तुजू में उसी की हम जुस्तुजू करेंगे

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

आप अपना रू-ए-ज़ेबा देखिए

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

हुस्न की ज़बान से

वहीदुद्दीन सलीम

आरियों की पहली आमद हिन्दोस्तान में

वहीदुद्दीन सलीम

शिद्दत-ए-शौक़ असर-ख़ेज़ है जादू की तरह

वाहिद प्रेमी

आज फिर सर-ए-मक़्तल दे के ख़ुद लहू हम ने

वाहिद प्रेमी

हमेशा ख़ून-ए-शहीदाँ के रंग से आबाद

वहीद क़ुरैशी

आइए जल्वा-ए-दीदार के दिखलाने को

वहीद इलाहाबादी

आग अपने ही दामन की ज़रा पहले बुझा लो

वहीद अख़्तर

एल्बम

वहीद अहमद

वो रंग का हुजूम सा वो ख़ुशबुओं की भीड़ सी

वहाब दानिश

थकावटों से बैठ के सफ़र उतारिए कहीं

वहाब दानिश

जाने कितना जीवन पीछे छूट गया अनजाने में

विश्वनाथ दर्द

अब हम चराग़ बन के सर-ए-राह जल उठे

विश्वनाथ दर्द

करना है कार-ए-ख़ैर तो फिर सर न देखना

विश्मा ख़ान विश्मा

उस एक शख़्स का कोई पता नहीं मिलता

विशाल खुल्लर

आग दरिया को इशारों से लगाने वाला

विशाल खुल्लर

घर में वही पीली तन्हाई रहती है

विकास शर्मा राज़

ज़रा लौ चराग़ की कम करो मिरा दुख है फिर से उतार पर

विकास शर्मा राज़

उसे छुआ ही नहीं जो मिरी किताब में था

विकास शर्मा राज़

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