रंग Poetry (page 12)

सदाक़त सादगी ओढ़े बुलंदी थाम लेती है

ताैफ़ीक़ साग़र

रेशम रेशम तितली देखूँ ख़्वाब-नगर की वादी में

ताैफ़ीक़ साग़र

ज़ेहन में हो कोई मंज़िल तो नज़र में ले जाऊँ

तसव्वुर ज़ैदी

बाक़ी सब कुछ फ़ानी है

तारिक़ राशीद दरवेश

जौन-एलिया से आख़री मुलाक़ात

तारिक़ क़मर

हवा रुकी है तो रक़्स-ए-शरर भी ख़त्म हुआ

तारिक़ क़मर

ज़ेहन पर बोझ रहा, दिल भी परेशान हुआ

तारिक़ क़मर

अब ये हंगामा-ए-दुनिया नहीं देखा जाता

तारिक़ नईम

कोई शिकवा था शिकायत थी गिला था क्या था

तनवीर गौहर

सूरतों के शहर में रौज़न ही रौज़न देख कर

तनवीर सामानी

जान मजबूर हूँ

तनवीर मोनिस

लम्हा-ए-इमकान को पहलू बदलते देखना

तनवीर अंजुम

राएगाँ सुब्ह की चिता पर

तनवीर अंजुम

चार साल बा'द

तनवीर अंजुम

लम्हा-ए-इमकान को पहलू बदलते देखना

तनवीर अंजुम

मिरी ग़ज़ल जो नए साज़ से इबारत है

तनवीर अहमद अल्वी

लम्हा-दर-लम्हा गुज़रता ही चला जाता है

तनवीर अहमद अल्वी

लम्हा-दर-लम्हा गुज़रता ही चला जाता है

तनवीर अहमद अल्वी

फ़िशार-ए-हुस्न से आग़ोश-ए-तंग महके है

तनवीर अहमद अल्वी

माल-ओ-ज़र की क़द्र क्या ख़ून-ए-जिगर के सामने

तालिब हुसैन तालिब

बे-कैफ़ मसर्रत भी मुसीबत सी लगे है

तालिब चकवाली

दर्द-ए-दिल को दास्ताँ-दर-दास्ताँ होने तो दो

तल्हा रिज़वी बारक़

बस एक शय मिरे अंदर तमाम होती हुई

तालीफ़ हैदर

मिरे ख़याल का साया जहाँ पड़ा होगा

तख़्त सिंह

हर अश्क तिरी याद का नक़्श-ए-कफ़-ए-पा है

तख़्त सिंह

एक एक क़तरा उस का शो'ला-फ़िशाँ सा है

तख़्त सिंह

ज़ख़्म कब का था दर्द उठा है अब

ताजदार आदिल

तिलिस्म-ए-इश्क़ था सब उस का साथ होने तक

ताजदार आदिल

बंद दरीचों के कमरे से पूर्वा यूँ टकराई है

ताज सईद

वफ़ा का ज़िक्र छिड़ा था कि रात बीत गई

तैमूर हसन

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