रंग Poetry (page 21)

जहान-ए-ख़्वाब-ए-मेहरबाँ की ख़ैर हो

शमशीर हैदर

हम तर्क-ए-तअ'ल्लुक़ का गिला भी नहीं करते

शम्स ज़ुबैरी

ग़म दिए हैं तो मसर्रत के गुहर भी देना

शम्स रम्ज़ी

किसी के वादा-ए-फ़र्दा में गुम है इंतिज़ार अब भी

शम्स फ़र्रुख़ाबादी

फ़रेब-ए-नज़र

शमीम करहानी

वो जुनूँ के अहद की चाँदनी ये गहन गहन की उदासियाँ

शमीम करहानी

उन का वादा बदल गया है

शमीम करहानी

निगार-ए-मह-वश ओ महबूब-ए-लाला-रू की तरह

शमीम करहानी

बचाओ दामन-ए-दिल ऐसे हम-नशीनों से

शमीम करहानी

फ़ुर्क़त की भयानक रातों को इस तरह गुज़ारा करता हूँ

शमीम जयपुरी

चाहा बयाँ करूँ जों है मेरे ख़याल में

शमीम हाश्मी

वो एक शोर सा ज़िंदाँ में रात भर क्या था

शमीम हनफ़ी

तीरगी चाँद को इनआम-ए-वफ़ा देती है

शमीम हनफ़ी

सूरज धीरे धीरे पिघला फिर तारों में ढलने लगा

शमीम हनफ़ी

सफ़र नसीब अगर हो तो ये बदन क्यूँ है

शमीम हनफ़ी

फिर लौट के इस बज़्म में आने के नहीं हैं

शमीम हनफ़ी

परछाइयों की बात न कर रंग-ए-हाल देख

शमीम हनफ़ी

नीले पीले सियाह सुर्ख़ सफ़ेद सब थे शामिल इसी तमाशे में

शमीम हनफ़ी

हर नक़्श-ए-नवा लौट के जाने के लिए था

शमीम हनफ़ी

अब क़ैस है कोई न कोई आबला-पा है

शमीम हनफ़ी

शर्मीली छूई-मूई अजब मोहनी सी थी

शमीम फ़ारूक़ी

आसमाँ का रंग मेरी ज़ात में घुल जाएगा

शमीम फ़ारूक़ी

किसी का तीर किसी की कमाँ हो ठीक नहीं

शमीम अब्बास

कभी भँवर थी जो इक याद अब सुनामी है

शमीम अब्बास

बस एक बार फ़क़त एक बार कम से कम

शमीम अब्बास

न संग-ए-राह न सद्द-ए-क़ुयूद की सूरत

शाम रिज़वी

किसी का साथ मियाँ जी सदा नहीं रहा है

शकील जमाली

ग़म का सूरज कभी ढलता ही नहीं

शकील ग्वालिआरी

वो अगर बुरा न मानें तो जहान-ए-रंग-ओ-बू में

शकील बदायुनी

रक़्क़ासा-ए-हयात से

शकील बदायुनी

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